भारत सरकार ने सस्ते विदेशी स्टील आयात पर लगाम लगाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। कुछ चुनिंदा नॉन-अलॉय और अलॉय स्टील फ्लैट प्रोडक्ट्स पर तीन साल के लिए सेफगार्ड ड्यूटी लागू की गई है। पहले साल यह शुल्क 12 प्रतिशत रहेगा, जो अगले दो वर्षों में घटकर 11.5 और फिर 11 प्रतिशत हो जाएगा। यह कदम घरेलू स्टील उद्योग को अचानक बढ़े आयात से बचाने के लिए उठाया गया है। इससे पहले भी अप्रैल 2025 में सरकार ने 200 दिनों के लिए 12 प्रतिशत का अंतरिम सुरक्षा शुल्क लगाया था।
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
यह पूरा मामला डायरेक्टरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज की जांच से जुड़ा है। दिसंबर में डीजीटीआर ने नॉन-अलॉय और अलॉय स्टील फ्लैट प्रोडक्ट्स के आयात में तेज उछाल की जांच शुरू की थी। यह जांच इंडियन स्टील एसोसिएशन की शिकायत पर हुई, जिसमें देश की बड़ी स्टील कंपनियां शामिल हैं। जांच में सामने आया कि ये स्टील उत्पाद फैब्रिकेशन, पाइप, निर्माण, ऑटोमोबाइल, ट्रैक्टर, साइकिल और इलेक्ट्रिकल पैनल जैसे अहम क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होते हैं।
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चीन जापान कोरिया से बढ़ा दबाव
जांच में खुलासा हुआ कि 2021-22 में जहां इन स्टील उत्पादों का आयात 22.93 लाख टन था, वहीं अक्टूबर 2023 से सितंबर 2024 की अवधि तक यह बढ़कर 66.12 लाख टन हो गया। यह तेज बढ़ोतरी खासतौर पर चीन, जापान, कोरिया और वियतनाम से हुई। डीजीटीआर ने माना कि इतनी बड़ी मात्रा में आयात से घरेलू स्टील उद्योग को नुकसान पहुंचा है। इसी वजह से सरकार ने सेफगार्ड ड्यूटी को जरूरी बताया, ताकि भारतीय उत्पादकों को राहत मिल सके।
किसे फायदा किसे नुकसान
जहां बड़ी स्टील कंपनियां इस फैसले को घरेलू उद्योग के लिए जरूरी बता रही हैं, वहीं स्टील का इस्तेमाल करने वाले उद्योग इससे नाराज हैं। इनका कहना है कि सेफगार्ड ड्यूटी से कच्चे माल की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे उनकी उत्पादन लागत बढ़ेगी और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा कमजोर होगी। सरकार के सामने अब चुनौती घरेलू स्टील निर्माताओं की सुरक्षा और स्टील उपयोग करने वाले उद्योगों की लागत के बीच संतुलन बनाए रखने की है।