रांची ODI में मिली 17 रनों की शानदार जीत ने भले ही टीम इंडिया को सीरीज में 1-0 की बढ़त दिला दी हो, लेकिन इस जीत के पीछे छिपी हलचल अब खुलकर सामने आने लगी है। विराट कोहली की 52वीं ODI सेंचुरी और रोहित शर्मा की तेजतर्रार पारी के बावजूद टीम के भीतर माहौल उतना शांत नहीं जितना बाहर से दिख रहा है। रिपोर्ट्स का दावा है कि हेड कोच गौतम गंभीर और कुछ सीनियर खिलाड़ियों के बीच रणनीति और फैसलों को लेकर मतभेद उभर आए हैं। गंभीर की हार्डलाइन अप्रोच हर किसी को रास नहीं आ रही, जिससे ड्रेसिंग रूम की हवा भारी हो गई है।
गंभीर का रवैया चर्चा में
गौतम गंभीर शुरू से ही साफ कह चुके हैं टीम में स्ट्रक्चर पहले, नाम बाद में। यह अप्रोच जहां कुछ खिलाड़ियों को प्रेरित कर रही है, वहीं कुछ को परेशान भी कर रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार रांची मुकाबले के बाद प्लानिंग और ऑन-फील्ड कॉल्स को लेकर गंभीर और 2–3 सीनियर चेहरों के बीच बहस जैसी स्थिति बनी। क्रिकेट जानकार कहते हैं कि भारतीय क्रिकेट इतिहास में कोच–कप्तान या कोच–सीनियर खिलाड़ियों की खटपट नई बात नहीं, लेकिन इस बार मामला सिर्फ फैसलों का नहीं बल्कि टीम कल्चर और कम्युनिकेशन का है, जो किसी भी टीम की नींव होते हैं।
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रायपुर में असली टेस्ट
जब टीम इंडिया आज रायपुर में दूसरे ODI के लिए उतरेगी, तो उसके सामने सिर्फ साउथ अफ्रीका ही चुनौती नहीं होगा… बल्कि टीम की एकजुटता भी असली परीक्षा से गुजरने वाली है। भारतीय टीम मैनेजमेंट जानता है कि मतभेदों की हल्की सी भी आंच बाहर आई तो उसका असर आने वाले महीनों तक पड़ सकता है। खासकर तब जब रोहित–कोहली टीम की सीनियर कोर हैं और भारतीय क्रिकेट अगले दो-तीन साल में बड़े बदलाव के दौर में प्रवेश करने वाला है।
मैदान का मुकाबला और भीतर की ‘साइलेंट बैटल’
दक्षिण अफ्रीका भले कमजोर नहीं दिखती लेकिन भारत के लिए असली चुनौती टीम के अंदर की ‘साइलेंट बैटल’ है। मार्करम, जानसेन और बावुमा जैसे खिलाड़ी रायपुर में ज्यादा आक्रामक रुख अपनाएंगे। ऐसे में भारतीय टीम को न सिर्फ स्किल बल्कि मानसिक मजबूती और सामूहिक फोकस भी दिखाना होगा। अगर टीम ने रांची जैसी ऊर्जा दोहराई तो ये जीत सिर्फ सीरीज में बढ़त नहीं, बल्कि ड्रेसिंग रूम की शांति के लिए भी बड़ी राहत होगी। लेकिन अगर दरारें मैदान तक पहुंचीं, तो अफ्रीका मुकाबला और मुश्किल कर सकता है।