भारत एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्य बनने की तैयारी में जुट गया है। इस बार भारत की नजर 2028 से 2029 तक की सदस्यता पर है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भारत की ओर से खास प्रचार की शुरुआत कर दी है। इस दौरान कई देशों के बड़े अधिकारी और राजनयिक मौजूद रहे।
जयशंकर ने दुनिया के सामने रखी भारत की बात
एस जयशंकर ने शांति के नाम से भारत की मुहिम शुरू की है। इसके जरिए भारत दुनिया के देशों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश करेगा। भारत का कहना है कि वह नियम भरोसे और जिम्मेदारी के साथ दुनिया में शांति और आगे बढ़ने की सोच को मजबूत करना चाहता है। इससे पहले भारत 2021 और 2022 में भी सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य रह चुका है।
ताजिकिस्तान से होगा भारत का मुकाबला
सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के लिए चुनाव अगले साल जून में होंगे। एशिया और प्रशांत देशों के हिस्से की एक सीट के लिए भारत और ताजिकिस्तान आमने-सामने होंगे। यानी भारत को सदस्य बनने के लिए दुनिया के ज्यादा से ज्यादा देशों का समर्थन हासिल करना होगा। इसी वजह से अभी से भारत ने अपनी तैयारी तेज कर दी है।
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दुनिया में बढ़ते तनाव के बीच चुनाव
यह चुनाव ऐसे समय में होने जा रहा है जब दुनिया के कई हिस्सों में तनाव बढ़ा हुआ है। यूक्रेन की लड़ाई गाजा का मामला और ईरान को लेकर चल रहे तनाव ने दुनिया की राजनीति को बदल दिया है। भारत का मानना है कि ऐसे समय में बड़े फैसलों में विकासशील देशों की आवाज भी मजबूती से सुनी जानी चाहिए।
भारत लंबे समय से उठा रहा सवाल
भारत कई सालों से कहता आ रहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का मौजूदा तरीका आज की दुनिया के हिसाब से बदलना चाहिए। भारत का कहना है कि 1945 में बनी व्यवस्था अब पुरानी हो चुकी है। सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी दोनों तरह के सदस्यों की संख्या बढ़नी चाहिए ताकि ज्यादा देशों को अपनी बात रखने का मौका मिले।
स्थायी सदस्यता पर भी भारत की नजर
भारत सिर्फ अस्थायी सदस्यता ही नहीं बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी जगह का भी दावेदार है। भारत लगातार दुनिया के सामने अपनी बात रखता रहा है। फिलहाल पहला लक्ष्य 2028-29 के लिए अस्थायी सदस्य बनना है। अब देखना होगा कि ताजिकिस्तान के खिलाफ इस मुकाबले में भारत कितने देशों का समर्थन हासिल कर पाता है।