भारत और अमेरिका के बीच होने वाली बड़ी ट्रेड बातचीत को लेकर उम्मीदें तेज हो गई हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने संकेत दिया है कि अगले महीने अमेरिकी व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भारत आ सकता है। माना जा रहा है कि इस बैठक में अंतरिम व्यापार समझौते और व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को आगे बढ़ाने पर अहम चर्चा होगी।
अमेरिकी बाजार में बढ़ सकता है भारतीय सामानों का दबदबा
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील आगे बढ़ती है तो भारतीय निर्यातकों को बड़ा फायदा मिल सकता है। खासतौर पर फार्मा, टेक्नोलॉजी, मेडिकल डिवाइस, इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग सेक्टर में भारतीय कंपनियों की पहुंच अमेरिकी बाजार में मजबूत हो सकती है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इससे भारतीय MSME सेक्टर को भी नई ताकत मिलेगी।
ट्रेड टॉक में अब तक क्या हुआ?
दोनों देशों ने इसी साल फरवरी में अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक साझा रूपरेखा पर सहमति जताई थी। इसके बाद अप्रैल में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने वॉशिंगटन डीसी में अमेरिकी अधिकारियों के साथ आमने-सामने बातचीत की। हालांकि अमेरिका द्वारा अतिरिक्त आयात शुल्क और सेक्शन 301 जांच शुरू किए जाने के बाद बातचीत और संवेदनशील हो गई। अमेरिका ने कई देशों पर अतिरिक्त उत्पादन क्षमता और श्रम मानकों को लेकर जांच शुरू की है, जिसमें भारत भी शामिल है। भारत ने इन जांचों पर अपना जवाब सौंप दिया है और दोनों देशों के बीच परामर्श जारी है।
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टेक्नोलॉजी और डिफेंस सेक्टर पर रहेगा फोकस
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और अमेरिका स्वाभाविक साझेदार की तरह काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि बीते कुछ महीनों में कई अमेरिकी कंपनियों ने भारत में बड़े निवेश की घोषणा की है। इसमें Amazon और Google जैसी कंपनियों के डेटा सेंटर निवेश भी शामिल हैं। सरकार का फोकस क्वांटम कंप्यूटिंग, हाई-प्रिसिजन डिफेंस, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, मेडिकल डिवाइस और एडवांस टेक्नोलॉजी सेक्टर में अमेरिका के साथ सहयोग बढ़ाने पर है।
MSME सेक्टर को मिल सकता है बड़ा सहारा
सरकार चाहती है कि भारत में काम कर रहीं अमेरिकी कंपनियां MSME यूनिट्स को तेजी से भुगतान करें, ताकि छोटे उद्योगों का नकदी प्रवाह मजबूत हो सके। इससे भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकते हैं।
वैश्विक संकट के बीच बढ़ रही साझेदारी
यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया तनाव और वैश्विक सप्लाई चेन संकट के बीच भारत और अमेरिका की बढ़ती साझेदारी को रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। आने वाली ट्रेड टॉक पर अब उद्योग जगत और निवेशकों की नजरें टिकी हुई हैं।