रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने के अमेरिकी प्रस्तावित विधेयक के बावजूद भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ता पर किसी तरह का असर पड़ने की संभावना नहीं है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत तय योजना के अनुसार आगे बढ़ रही है और रूसी तेल का मुद्दा वार्ता में बाधा नहीं बना है।
रूसी तेल नहीं बना बातचीत का विवाद
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत और अमेरिका के बीच फरवरी में व्यापार समझौते के लिए जिस रूपरेखा पर सहमति बनी थी, उसके बाद भी बातचीत लगातार आगे बढ़ती रही। सूत्रों ने कहा कि रूसी तेल की खरीद का मुद्दा बाद के किसी भी दौर की वार्ता में विवाद का कारण नहीं बना। पिछले महीने हुई बातचीत में भी इस विषय को लेकर कोई रुकावट नहीं आई और दोनों पक्ष व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
अमेरिका में क्या है नया प्रस्ताव?
14 जुलाई को अमेरिकी सीनेटरों के एक द्विदलीय समूह ने रूस पर प्रतिबंध से जुड़ा संशोधित विधेयक पेश किया। इसके तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को भारत और चीन सहित रूस से तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों से आयात पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया जा सकता है। इसका उद्देश्य रूस की ऊर्जा बिक्री से मिलने वाले राजस्व पर दबाव बढ़ाना है। हालांकि यह प्रस्ताव पहले के 500 प्रतिशत टैरिफ वाले मसौदे की तुलना में काफी नरम माना जा रहा है।
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ट्रेड डील पर तेजी से बढ़ रही बातचीत
सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारत और अमेरिका दोनों ही व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने हाल ही में बताया कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका ट्रेड डील का फ्रेमवर्क समझौता हस्ताक्षर के लिए तैयार है। दोनों पक्ष अब केवल उचित समय और औपचारिक प्रक्रिया पर सहमति बनाने में जुटे हैं। साथ ही व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर भी बातचीत बिना किसी रुकावट के जारी है।
भारत चाहता है प्रतिस्पर्धी बढ़त
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल पहले ही संकेत दे चुके हैं कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का मसौदा लगभग तैयार है। हालांकि इसे तभी लागू किया जाएगा जब भारत को वियतनाम, थाईलैंड, फिलीपींस, चीन, मलेशिया, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसी प्रतिस्पर्धी विनिर्माण अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहतर टैरिफ लाभ मिल जाए। हाल ही में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर के साथ हुई बैठकों में बाजार पहुंच, डिजिटल व्यापार, सप्लाई चेन, गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने जैसे अहम मुद्दों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।