भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर दो दिवसीय वार्ता के लिए भारत पहुंच रहे हैं। इस बैठक में दोनों देशों के बीच टैरिफ, बाजार पहुंच और व्यापारिक रियायतों जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। भारत की कोशिश है कि 24 जुलाई से पहले इस समझौते को अंतिम रूप दे दिया जाए, ताकि उसके निर्यातकों को बेहतर व्यापारिक अवसर मिल सकें।
भारत की प्राथमिकता बेहतर टैरिफ व्यवस्था
नई दिल्ली चाहती है कि उसे वियतनाम और अन्य एशियाई प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में अधिक अनुकूल व्यापार शर्तें मिलें। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत अमेरिका के साथ ऐसे समझौते की दिशा में काम कर रहा है, जिससे भारतीय निर्यातकों को तुलनात्मक लाभ मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि यदि 24 जुलाई से पहले डील पूरी हो जाती है तो यह दोनों देशों के लिए सकारात्मक कदम होगा।
अस्थायी अमेरिकी टैरिफ की समय सीमा अहम
भारत के लिए 24 जुलाई की तारीख इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसी दिन अमेरिका द्वारा कई व्यापारिक साझेदार देशों पर लगाया गया अस्थायी 10 प्रतिशत टैरिफ समाप्त होने वाला है। भारत चाहता है कि समझौते के बाद भविष्य में अचानक नए शुल्क लागू करने की स्थिति से भी बचाव हो सके।
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कई मुद्दों पर बनी हुई है चुनौती
हालांकि व्यापार वार्ता के बीच कुछ मुद्दों को लेकर तनाव भी बना हुआ है। अमेरिका की सेक्शन 301 जांच, व्यापार बाधाओं से जुड़े सवाल और भारतीय बाजार में अमेरिकी कृषि, ऊर्जा और रक्षा उत्पादों की पहुंच जैसे विषय बातचीत के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका इन मुद्दों के जरिए भारत से अधिक बाजार पहुंच चाहता है।
फरवरी की सहमति के बाद अब अंतिम चरण में बातचीत
फरवरी में दोनों देशों के बीच शुरुआती व्यापारिक समझ पर सहमति बनी थी, जिसके तहत भारत को अपेक्षाकृत कम टैरिफ लाभ मिलने और बदले में कुछ व्यापार बाधाओं को कम करने पर चर्चा हुई थी। हालांकि बाद की परिस्थितियों और अमेरिकी नीतिगत बदलावों के कारण अंतिम समझौता लंबित रहा। अब दोनों देशों की ताजा बातचीत को इस डील के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।