भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित इंटरिम ट्रेड डील अब अपने आखिरी दौर में पहुंचती दिख रही है। इस समझौते के तहत भारत ने कई अहम अमेरिकी सामानों पर टैरिफ में बड़ी राहत देने का फैसला किया है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री ने साफ कर दिया है कि 18 फीसदी टैरिफ की पुरानी चर्चा अब मायने नहीं रखती। सरकार का फोकस जरूरी और संवेदनशील सामानों पर टैक्स घटाकर आम लोगों को सीधा फायदा पहुंचाने पर है। माना जा रहा है कि यह डील मार्च 2026 के आसपास कानूनी रूप ले सकती है।
दवाओं पर जीरो टैक्स से मरीजों को राहत
इस डील का सबसे बड़ा फायदा स्वास्थ्य क्षेत्र को मिलने वाला है। कैंसर, दिल की बीमारियों और न्यूरो से जुड़े इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ खास दवाओं पर भारत जीरो टैरिफ लगाने जा रहा है। इसका मतलब है कि अमेरिका से आने वाली ये महंगी दवाएं अब सस्ती होंगी। सरकार का मानना है कि इससे इलाज का खर्च घटेगा और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को राहत मिलेगी। साथ ही जिन मेडिकल उपकरणों का देश में उत्पादन शुरू हो चुका है लेकिन सप्लाई कम है, उन पर भी टैक्स में ढील दी जाएगी।
केमिकल और मेडिकल उपकरणों को भी फायदा
सिर्फ दवाएं ही नहीं, बल्कि ऑर्गेनिक और इनऑर्गेनिक केमिकल्स पर भी टैक्स में राहत की तैयारी है। ये केमिकल्स दवा, खेती और इंडस्ट्री में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होते हैं। इसके अलावा मेडिकल डिवाइसेज, कॉस्मेटिक्स और कुछ खास उपकरणों पर पहले से दी जा रही रियायत को आगे भी जारी रखा जाएगा। सरकार का कहना है कि इन फैसलों से घरेलू उद्योग पर दबाव नहीं पड़ेगा, बल्कि जरूरत के सामान आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे।
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ड्राय फ्रूट्स और ड्रिंक्स पर चरणबद्ध छूट
अमेरिका से आने वाले पिस्ता और बादाम जैसे ड्राय फ्रूट्स लंबे समय से भारतीय बाजार का हिस्सा हैं। अब इन पर भी चरणबद्ध तरीके से टैरिफ खत्म करने की योजना है। इससे आम लोगों को ये प्रोडक्ट्स सस्ते दाम पर मिल सकेंगे। इसके साथ ही कुछ खास ड्रिंक्स और पशुपालन से जुड़े उत्पादों को भी मंजूरी दी जाएगी, जिससे किसानों और पशुपालकों को फायदा होगा।
500 अरब डॉलर की खरीद की तैयारी
इस ट्रेड डील के तहत भारत अगले पांच साल में अमेरिका से करीब 500 अरब डॉलर के सामान खरीदने की योजना बना रहा है। इसमें ऊर्जा उत्पाद, विमान और उनके पुर्जे, कीमती धातुएं, टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स और कोकिंग कोल शामिल हैं। इसके अलावा आईसीटी प्रोडक्ट्स और मेडिकल डिवाइसेज के आयात नियमों को भी आसान किया जाएगा, ताकि कारोबार में रुकावट न आए।
भारत के हितों का रखा गया ध्यान
सरकार ने साफ किया है कि जीरो टैरिफ का फैसला सोच-समझकर लिया गया है। घरेलू उत्पादन, रोजगार और स्थानीय उद्योगों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इस डील का मकसद है जरूरी सामान को सस्ता करना, मरीजों और उपभोक्ताओं को राहत देना और भारत-अमेरिका के व्यापारिक रिश्तों को नई मजबूती देना। आने वाले समय में यह समझौता दोनों देशों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है।