भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर चल रही बातचीत में बड़ा खुलासा हुआ है। अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमिसन ग्रीर ने खुद माना कि भारत को मनाना आसान नहीं है। उन्होंने भारत को एक ऐसा देश बताया जिसे किसी भी तरह के समझौते के लिए मनाना बहुत मुश्किल है। अमेरिका चाहता है कि भारत उनके कृषि उत्पादों का बड़ा बाजार बने, क्योंकि दुनिया भर में अनाज की सप्लाई बढ़ने से अमेरिकी किसानों को नए बाजारों की जरूरत है। लेकिन भारत कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील सेक्टर्स में कोई ढील देने को तैयार नहीं है।
कृषि आयात पर भारत का कड़ा रुख
अमेरिकी अधिकारियों ने माना कि भारत के सख्त कृषि कानून और खासतौर पर मांस और डेयरी उत्पादों पर आयात प्रतिबंध बड़ी चुनौती बने हुए हैं। इन मसलों पर भारत झुकने को तैयार नहीं है। अमेरिकी सीनेट कमेटी में ग्रीर ने बताया कि भारत अब तक की सबसे बेहतर पेशकश कर चुका है, लेकिन इसके बावजूद भारत से समझौता आसान नहीं है। भारत खुले तौर पर कह चुका है कि घरेलू किसानों की सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी समझौते में यह नीति नहीं बदलेगी।
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अमेरिका बोला भारत के बिना नहीं चलेगा काम
दुनिया में गेहूं का उत्पादन 1.10 अरब टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के अनुमान के बाद अमेरिका जैसे देशों पर दबाव बढ़ गया है कि वे अपने उत्पाद बेचने के लिए नए बाजार खोजें। यूएसडीए की रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडा, रूस, अर्जेंटीना, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में उत्पादन बढ़ा है और ऐसे में अमेरिकी निर्यातकों को भारत सबसे बड़ा और स्थिर बाजार दिख रहा है। इसलिए अमेरिका इस समझौते को लेकर बेहद गंभीर है और लगातार बातचीत करने की कोशिश कर रहा है।
बातचीत के बावजूद भारत को मनाना मुश्किल
अमेरिका जहां इस डील को लेकर आशावादी है, वहीं उसने यह भी मान लिया है कि भारत एक ऐसी आर्थिक शक्ति है जिस पर दबाव डालकर कोई समझौता नहीं कराया जा सकता। ग्रीर ने स्वीकार किया कि भारत का राजनीतिक और आर्थिक ढांचा बेहद मजबूत है और कृषि, फसल सुरक्षा और किसानों के हित जैसे मसलों पर भारत किसी भी विदेशी दबाव के आगे नहीं झुकता। फिर भी अमेरिका मानता है कि भारत एक भरोसेमंद व्यापारिक साझेदार है और बातचीत आगे बढ़ सकती है।