
अमेरिका के ट्रेड रिप्रेज़ेंटेटिव ऑफिस (USTR) की टीम सोमवार (15 सितंबर 2025) रात नई दिल्ली पहुंची। मंगलवार को अमेरिकी मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच और भारत के वाणिज्य मंत्रालय के बीच दिनभर बातचीत हुई। भारत सरकार ने कहा कि चर्चाएं "सकारात्मक" रहीं और दोनों पक्षों ने "पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने" का संकल्प लिया। यह वार्ता उस पृष्ठभूमि में हुई जब अमेरिका ने 27 अगस्त से भारत पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाया था। इससे कुल टैरिफ दर 50% हो गई है। यह कदम भारत द्वारा रूसी तेल खरीद जारी रखने के कारण उठाया गया था। अमेरिका ने इसी वजह से ट्रेड वार्ता को रोक दिया था। हालांकि अब बातचीत दोबारा शुरू हो गई है।
क्या डील से घटेगा टैक्स बोझ?
भारत और अमेरिका के बीच चर्चाओं का केंद्र यही है कि अगर ट्रेड डील होती है तो क्या मौजूदा 50% टैरिफ कम होगा। उद्योग जगत की बड़ी चिंता यही है कि सौदा होने के बाद भारतीय सामानों पर आखिरकार कितना टैक्स लगेगा। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल पहले ही कह चुके हैं कि नवंबर 2025 तक डील का पहला चरण फाइनल हो सकता है।
भारत की "रेड लाइन्स"
भारत का रुख साफ है कि कृषि और डेयरी को सौदे का हिस्सा नहीं बनाया जाएगा। सरकार इन्हें व्यापार नहीं बल्कि 70 करोड़ से ज्यादा किसानों की आजीविका का प्रश्न मानती है। भारत की रणनीति यह है कि अधिकांश औद्योगिक वस्तुओं पर टैरिफ खत्म कर दिया जाए, जिसमें अमेरिका के 95% से अधिक निर्यात शामिल होंगे। लेकिन राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों पर सुरक्षा कवच बनाए रखा जाएगा।
वार्ता में अन्य जटिल मुद्दे भी शामिल किए गए हैं-
भारतीय पेटेंट कानूनों में ढील
डेटा फ्लो की स्वतंत्रता
अमेरिकी ई-कॉमर्स कंपनियों को सीधे उत्पाद बेचने की अनुमति
भारतीय सरकारी टेंडर तक अमेरिका की पहुंच
सबसे बड़ी चुनौती यही है कि भारत अपनी रेगुलेटरी स्वायत्तता और आर्थिक संप्रभुता से समझौता किए बिना कितनी रियायत देता है।
टैरिफ से भारी नुकसान
भारत का अमेरिकी निर्यात मई 2025 से लगातार घट रहा है। अगस्त में गिरावट सबसे अधिक रही, जब निर्यात $6.7 बिलियन तक सिमट गया—जुलाई से 16.3% कम।
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50% टैरिफ का सबसे ज्यादा असर श्रम-प्रधान सेक्टर्स पर पड़ा है:
टेक्सटाइल और अपैरल
जेम्स एंड ज्वेलरी
लेदर
झींगा (Shrimp)
कालीन
अनुमान है कि FY 2026 तक भारत को $30-35 बिलियन का नुकसान हो सकता है। जबकि फार्मा और स्मार्टफोन जैसे कुछ सेक्टर अभी भी टैरिफ-फ्री हैं।
इंडस्ट्री की मांगें और सरकार का रुख
निर्यातक मांग कर रहे हैं कि उन्हें ब्याज दर सब्सिडी (Interest Equalization Scheme), ड्यूटी रिमिशन की तेज प्रोसेसिंग और लिक्विडिटी सपोर्ट दिया जाए, ताकि फैक्ट्रियां बंद न हों। जिसको लेकर सरकार ने घरेलू खपत बढ़ाने के लिए GST दरें घटाई हैं लेकिन निर्यातकों के लिए विशेष राहत पैकेज अभी तक घोषित नहीं हुआ है। अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि आने वाले हफ्तों में क्या वाकई कोई ठोस प्रगति होगी और क्या भारतीय निर्यातकों को 50% टैरिफ से राहत मिलेगी।