गुवाहाटी टेस्ट में टीम इंडिया को 408 रनों से मिली शर्मनाक हार ने भारतीय टेस्ट क्रिकेट को कठघरे में खड़ा कर दिया है। टेम्बा बावुमा की कप्तानी वाली साउथ अफ्रीकी टीम ने भारत को 5वें दिन बुरी तरह मात दी और 549 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम महज 140 रन पर सिमट गई। इससे पहले पहली पारी में भी भारत 201 रन ही बना पाया। इस तरह साउथ अफ्रीका ने 25 साल बाद भारत में टेस्ट सीरीज जीती और 2-0 से क्लीन स्वीप किया। कोलकाता टेस्ट 30 रन से जीतने के बाद अफ्रीका पहले ही बढ़त बना चुका था।
गंभीर के दौर में लगातार गिरता टेस्ट प्रदर्शन
गौतम गंभीर के कोच बनने के बाद टीम इंडिया का टेस्ट रिकॉर्ड लगातार खस्ता होता गया है। 2024 में न्यूजीलैंड ने भारत को 3-0 से हराया और पहली बार घर में तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में क्लीन स्वीप किया। इसके बाद 2025 में साउथ अफ्रीका ने भारत को उसके ही घर में 25 साल बाद हरा दिया। गंभीर के कार्यकाल में यह तीसरा मौका है जब भारत घरेलू सीरीज हारा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि टीम चयन और बदलावों ने भारत का संतुलन पूरी तरह बिगाड़ दिया है।
आंकड़े बता रहे टीम इंडिया का बुरा हाल
गंभीर युग में टीम इंडिया के सामने कई डरावने आंकड़े उभरे हैं। 66 साल में पहली बार भारत ने सात महीनों में पांच टेस्ट मैच गंवाए हैं। 25 साल में पहली बार दो लगातार सीजन में भारत घरेलू टेस्ट सीरीज हारा है। इससे भी बड़ा झटका यह कि टीम इंडिया को अपने इतिहास की सबसे बड़ी रनों के अंतर वाली टेस्ट हार मिली है 408 रन। इतना ही नहीं गंभीर के कोचिंग कार्यकाल में भारत ने सिर्फ दो सीरीज जीती हैं, वह भी वेस्टइंडीज और बांग्लादेश जैसी लो-रैंक्ड टीमों के खिलाफ।
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गंभीर पर बढ़ा दबाव, BCCI क्या लेगा बड़ा फैसला?
जुलाई 2024 में गंभीर ने राहुल द्रविड़ की जगह कोचिंग संभाली थी और उनका कार्यकाल 2027 वर्ल्ड कप तक है। लेकिन लगातार खराब टेस्ट प्रदर्शन ने उनकी रणनीति और चयन नीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई दिग्गज खिलाड़ियों का टेस्ट करियर भी इन्हीं बदलावों में खत्म बताया जा रहा है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या बीसीसीआई इस गिरते प्रदर्शन पर कोई एक्शन लेगा या गंभीर को आगे और मौका देगा। फिलहाल टीम इंडिया का टेस्ट सेट-अप बड़े बदलाव की मांग कर रहा है और आने वाले समय में बड़े फैसले होने तय माने जा रहे हैं।