मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय एविएशन सेक्टर पर साफ नजर आने लगा है। कई एयरपोर्ट या तो बंद हैं या सीमित क्षमता पर काम कर रहे हैं, जिससे भारतीय एयरलाइंस की उड़ान योजनाएं प्रभावित हुई हैं। इस स्थिति को देखते हुए अब एयरलाइंस ने वैकल्पिक रणनीति तैयार कर ली है। सरकार और कंपनियां मिलकर नए बाजारों की तलाश में जुट गई हैं ताकि उड़ानों का संचालन प्रभावित न हो और यात्रियों को परेशानी भी न उठानी पड़े।
क्या साउथ-ईस्ट एशिया बन रहा नया विकल्प?
सूत्रों के मुताबिक, भारत अब साउथ-ईस्ट एशिया की ओर तेजी से रुख कर रहा है। थाईलैंड, वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देशों के साथ उड़ानों की संख्या बढ़ाने पर बातचीत शुरू होने जा रही है। हाल ही में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में इस दिशा में फैसला लिया गया है। नागरिक उड्डयन से जुड़े अधिकारी इन देशों के साथ नई फ्लाइट्स और सीट क्षमता बढ़ाने के विकल्पों पर चर्चा करेंगे।
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एयरलाइंस पर कितना असर पड़ा?
मिडिल ईस्ट भारतीय एयरलाइंस के लिए बेहद अहम बाजार रहा है। इंडिगो, एयर इंडिया और स्पाइसजेट जैसी कंपनियों की करीब 40 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय उड़ानें इसी क्षेत्र में संचालित होती हैं। मौजूदा हालात के कारण गर्मियों के सीजन में भी विमान पूरी क्षमता से इस्तेमाल नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में कंपनियों के सामने चुनौती है कि वे अपने नेटवर्क को बनाए रखते हुए नए रूट्स तलाशें।
यात्रियों को क्या फायदा मिलेगा?
साउथ-ईस्ट एशिया पहले से ही भारतीय पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है। आसान वीजा नियम, कम खर्च और कम समय में यात्रा इसे और आकर्षक बनाते हैं। उड़ानों की संख्या बढ़ने से यात्रियों को ज्यादा विकल्प मिलेंगे और टिकट की कीमतें भी नियंत्रण में रह सकती हैं। साथ ही पीक सीजन में टिकट मिलने की समस्या भी कम होगी, जिससे यात्रा पहले के मुकाबले ज्यादा सुविधाजनक हो जाएगी।