
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को कहा कि कुछ भारतीय कंपनियों को बड़ी सफलता मिली है। चीन से दुर्लभ मृदा चुंबकों (रेयर अर्थ मैग्नेट)के आयात के लिए लाइसेंस मिल गए हैं। चुंबकों के आयात के लिए कम से कम तीन भारतीय कंपनियों को यह मौका मिला है। कॉन्टिनेंटल इंडिया, हिताची और जय उशिन को सरकारी मंजूरी मिल गई है। कंपनियां भारत के ऑटोमोटिव और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों के लिए पुर्जे देती हैं।
निर्यात पर कड़े नियंत्रण लगाए थे
अप्रैल की शुरुआत में बीजिंग की ओर से इन चुंबकों के निर्यात पर कड़े नियंत्रण लगाए जाने के बाद से यह पहली मंजूरी है। इस कदम का लक्ष्य अपूर्ति संबंधी उन समस्याओं को दूर करना है। इसका भारत के प्रमुख उद्योगों पर असर पड़ा है।
अमेरिका और चीन के बीच वार्ता का प्रभाव
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, हमें यह देखना होगा कि अमेरिका और चीन के बीच वार्ता का असर क्या होता है। हमारे क्षेत्र में किस तरह प्रभाव होगा। आयात लाइसेंस में खास शर्तें जुड़ी हैं। आयातित चुंबकों को यूएस को दोबारा निर्यात नहीं किया जा सकता। इसके साथ न ही उनका उपयोग रक्षा संबंधी उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।
चीन के साथ बातचीत कर रहा
विदेश मंत्रालय ने जून 2025 में पहले ही पुष्टि की थी कि वह दुर्लभ मृदा सामग्रियों की आपूर्ति सुनिश्चित करने और व्यापार आपूर्ति शृंखला में पूर्वानुमानशीलता लाने को लेकर चीन के साथ बातचीत कर रहा है।
दोनों नेताओं के बीच दक्षिण कोरिया में अहम मुलाकात
यह घोषणा दोनों नेताओं के बीच दक्षिण कोरिया के बुसान में 32वें एपेक आर्थिक नेताओं की बैठक में हुई खास मुलाकात के बाद की गई। यह बैठक काफी अहम है। छह वर्षों में पहली आमने-सामने की बैठक थी। ट्रंप ने कहा कि समझौते का वार्षिक नवीनीकरण होगा। यह दोनों देशों के तनावपूर्ण व्यापार संबंधों में अहम प्रगति का अगुवाई करता है।