Hydrogen Trains India : भारतीय रेलवे अब ट्रेनों को और ज्यादा साफ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। देश में पहली हाइड्रोजन ट्रेन शुरू होने के बाद रेलवे ने ऐसी 35 और ट्रेनों को चलाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके साथ ही रेलवे हाइड्रोजन की कीमत कम करने के तरीकों पर भी काम कर रहा है।
पहली हाइड्रोजन ट्रेन से मिली हिम्मत
भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को जुलाई 2026 में हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच शुरू किया गया था। यह ट्रेन हाइड्रोजन से बिजली बनाकर चलती है। इसके चलने पर डीजल इंजन की तरह धुआं नहीं निकलता, बल्कि पानी की भाप निकलती है। रेलवे के अनुसार, इस ट्रेन ने शुरुआत के बाद 1200 किलोमीटर से ज्यादा की यात्रा की और 3200 लीटर से अधिक डीजल की बचत हुई।
35 और ट्रेनों पर बड़ा काम
पहली ट्रेन के सफल संचालन के बाद रेलवे अब 35 अतिरिक्त हाइड्रोजन ट्रेनों को अपने बेड़े में शामिल करने की योजना पर आगे बढ़ रहा है। हालांकि, इन सभी ट्रेनों के लिए अभी अलग-अलग रूट की पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। रेलवे का ध्यान पहले हाइड्रोजन ईंधन की लागत कम करने पर भी है। दरअसल, हाइड्रोजन ट्रेन चलाने में सबसे बड़ी चुनौती ईंधन की कीमत है। रेलवे ज्यादा कंपनियों से हाइड्रोजन खरीदने के विकल्प तलाश रहा है। इससे कंपनियों के बीच मुकाबला बढ़ सकता है और भविष्य में रेलवे को कम कीमत पर हाइड्रोजन मिलने की उम्मीद है।
कैसे चलती है हाइड्रोजन ट्रेन
हाइड्रोजन ट्रेन में ईंधन सेल की मदद से बिजली बनाई जाती है। इसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली पैदा होती है, जिससे ट्रेन चलती है। इस प्रक्रिया में पानी की भाप निकलती है। यही वजह है कि इसे प्रदूषण कम करने वाली तकनीक माना जा रहा है।
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रेलवे के लिए क्यों खास है यह योजना
भारतीय रेलवे लंबे समय से डीजल पर निर्भरता कम करने और साफ ऊर्जा को बढ़ावा देने पर काम कर रहा है। हाइड्रोजन ट्रेनों की संख्या बढ़ने से रेलवे को ऐसे रूट पर एक नया विकल्प मिल सकता है, जहां पूरी तरह बिजली वाली ट्रेन चलाना आसान नहीं है। अगर रेलवे हाइड्रोजन की कीमत कम करने में सफल होता है, तो आने वाले समय में देश में इस तकनीक का इस्तेमाल और बढ़ सकता है। 35 नई ट्रेनों की योजना इसी दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।