देशभर में हर दिन करोड़ों यात्री ट्रेन से सफर करते हैं, लेकिन आज भी रेलवे की कई उपयोगी सुविधाएं आम लोगों की नजर से दूर हैं। इन्हीं में से एक है सर्कुलर जर्नी टिकट। यह टिकट खास तौर पर घूमने-फिरने, टूर प्लान करने और तीर्थ यात्रा पर निकलने वालों के लिए बनाई गई है। जानकारी की कमी के कारण बहुत कम यात्री इसका इस्तेमाल कर पाते हैं, जबकि सही तरह से समझ लिया जाए तो यह सुविधा समय और पैसे दोनों की बचत करा सकती है।
क्या होता है सर्कुलर जर्नी टिकट
रेलवे के नियमों के मुताबिक सर्कुलर जर्नी टिकट ऐसी यात्रा के लिए जारी किया जाता है, जिसमें सफर की शुरुआत और समाप्ति एक ही स्टेशन पर होती है। इस टिकट के जरिए यात्री एक तय रूट पर कई शहरों और स्टेशनों से होकर यात्रा कर सकता है और अंत में उसी स्टेशन पर वापस लौटता है, जहां से सफर शुरू हुआ था। खास बात यह है कि एक सर्कुलर जर्नी टिकट पर यात्री अधिकतम 8 अलग-अलग स्टेशनों से यात्रा कर सकता है और अलग-अलग ट्रेनों में सफर करने की भी अनुमति होती है।
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56 दिन की वैधता और कम किराया
सर्कुलर जर्नी टिकट की वैधता रेलवे नियमों के अनुसार 56 दिनों तक होती है। यानी यात्री अपने टूर प्लान के हिसाब से रुक-रुक कर यात्रा कर सकता है और बार-बार नया टिकट लेने की जरूरत नहीं पड़ती। इस टिकट पर टेलिस्कोपिक किराया लागू होता है, जो सामान्य प्वाइंट-टू-प्वाइंट टिकट के मुकाबले सस्ता पड़ता है। जितने ज्यादा स्टेशन यात्रा में शामिल होते हैं, उतना ही प्रति किलोमीटर किराया कम हो जाता है, इसलिए यह विकल्प कई अलग-अलग टिकट बुक कराने से ज्यादा किफायती साबित होता है।
कौन ले सकता है और कैसे बुक होगा टिकट
सर्कुलर जर्नी टिकट स्लीपर से लेकर फर्स्ट क्लास तक सभी श्रेणियों में उपलब्ध होता है। यह टिकट अकेले यात्रियों के साथ-साथ ग्रुप में यात्रा करने वालों के लिए भी बनवाया जा सकता है। रेलवे के नियमों के अनुसार, अगर इस टिकट के तहत कम से कम 1000 किलोमीटर की यात्रा होती है, तो वरिष्ठ नागरिकों को किराए में छूट भी मिलती है। हालांकि यह टिकट सीधे काउंटर से नहीं मिलता। यात्रियों को पहले अपनी पूरी यात्रा का रूट रेलवे अधिकारियों को बताना होता है। रूट फाइनल होने के बाद किराया तय किया जाता है और फिर संबंधित स्टेशन से टिकट जारी किया जाता है, जिसके बाद अलग-अलग चरणों के लिए सीट रिजर्व कराई जाती है।