LNG Dual Fuel Train : भारतीय रेलवे ने 27 सितंबर 2026 को गुजरात के साबरमती से देश की पहली LNG आधारित डुअल-फ्यूल DEMU ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। यह ट्रेन पूरी तरह डीजल पर निर्भर नहीं रहेगी, बल्कि LNG और डीजल दोनों की मदद से चलेगी। रेलवे का मानना है कि इस तकनीक से ईंधन लागत कम होगी और पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा।
क्या होता है LNG फ्यूल?
LNG यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस, प्राकृतिक गैस का तरल रूप होता है। इसे करीब -162 डिग्री सेल्सियस तापमान पर ठंडा करके तैयार किया जाता है। तरल बनने के बाद इसका आकार काफी कम हो जाता है, जिससे इसे कम जगह में सुरक्षित तरीके से स्टोर किया जा सकता है। यही वजह है कि दुनिया के कई देशों में LNG का इस्तेमाल परिवहन और ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा है।
🚆 साबरमती से भारतीय रेल में हरित ऊर्जा के नए अध्याय का शुभारंभ! 🌱🇮🇳
— DRM Ahmedabad (@drmadiwr) September 27, 2026
माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी द्वारा आज साबरमती से भारतीय रेल की पहली LNG-powered ट्रेन का शुभारंभ किया जाएगा।
डीज़ल + LNG ड्यूल-फ्यूल तकनीक पर आधारित यह पहल पारंपरिक ईंधन पर… pic.twitter.com/7fhLohXDzz
ट्रेन में कैसे रखा जाता है LNG?
ट्रेन के ड्राइविंग पावर कार में विशेष क्रायोजेनिक टैंक लगाए गए हैं। ये टैंक बेहद कम तापमान पर LNG को सुरक्षित रखने के लिए तैयार किए जाते हैं। जब ट्रेन चलती है तो टैंक में मौजूद LNG को फिर गैस में बदला जाता है। इसके बाद यह गैस इंजन तक पहुंचती है और डीजल के साथ मिलकर इंजन को शक्ति देती है।
ये भी पढ़ें : 3 दिन की बैंक हड़ताल टली, लेकिन खत्म नहीं हुआ विवाद, यूनियन ने दी अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी
डुअल-फ्यूल तकनीक कैसे करती है काम?
इस ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत इसका डुअल-फ्यूल इंजन है। यानी इंजन एक साथ दो तरह के ईंधन का इस्तेमाल कर सकता है। जरूरत के मुताबिक LNG और डीजल दोनों मिलकर ट्रेन को चलाते हैं। इससे इंजन को पूरी तरह डीजल पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। रेलवे का अनुमान है कि इस तकनीक से डीजल की खपत में 40 से 50 प्रतिशत तक कमी आ सकती है।
पुराने डीजल इंजन से कितना अलग?
पारंपरिक डीजल इंजन वाली ट्रेनों में पूरा संचालन डीजल के सहारे होता है। लेकिन नई LNG आधारित ट्रेन में डीजल का एक बड़ा हिस्सा LNG से बदला जा सकता है। इससे ईंधन पर होने वाला खर्च कम होगा और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आने की संभावना है। यही कारण है कि रेलवे इसे भविष्य की तकनीक के रूप में देख रहा है।
रेलवे के लिए क्यों अहम है यह प्रयोग?
भारतीय रेलवे हर साल बड़ी मात्रा में डीजल की खपत करता है। ऐसे में यदि LNG आधारित तकनीक सफल रहती है तो आने वाले समय में और भी ट्रेनों में इसे अपनाया जा सकता है। इससे रेलवे के ईंधन खर्च में कमी आएगी, प्रदूषण घटेगा और स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को भी बढ़ावा मिलेगा। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि यह नई तकनीक संचालन और लागत के स्तर पर कितनी सफल साबित होती है।