भारतीय मुद्रा में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है और रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.23 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ है। इंटरबैंक बाजार में दिन की शुरुआत 94.95 पर हुई, लेकिन लगातार दबाव के चलते यह फिसलता गया और अंत में 39 पैसे टूटकर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले रुपया 94.84 पर बंद हुआ था। भारतीय रुपया पर बढ़ते दबाव ने बाजार में चिंता बढ़ा दी है।
तेल और तनाव बना बड़ी वजह
रुपए की गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ता तनाव और महंगा कच्चा तेल है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 109 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है, जिससे भारत जैसे आयात करने वाले देशों पर सीधा असर पड़ता है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इससे महंगाई बढ़ने और आर्थिक दबाव बढ़ने का खतरा भी सामने आ रहा है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर
रुपए की कमजोरी का एक बड़ा कारण विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी है। आंकड़ों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशकों ने हाल ही में हजारों करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। इससे बाजार में डॉलर की मांग बढ़ गई और रुपये की स्थिति कमजोर होती चली गई। निवेशकों का भरोसा कम होने से पूंजी बाहर जा रही है, जिसका असर सीधे मुद्रा पर दिख रहा है।
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डॉलर की मजबूती ने बढ़ाया दबाव
वैश्विक बाजार में डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है। डॉलर इंडेक्स 98.26 के स्तर पर पहुंच गया है, जो बताता है कि डॉलर अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले मजबूत बना हुआ है। ऐसे में उभरते बाजारों की मुद्राएं दबाव में आ जाती हैं और रुपया भी इसी ट्रेंड का शिकार हुआ है।
शेयर बाजार में मिला मिला-जुला संकेत
हालांकि मुद्रा में गिरावट के बीच घरेलू शेयर बाजार में हल्की मजबूती देखने को मिली। सेंसेक्स करीब 355 अंक चढ़कर 77,269 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 24,119 के स्तर पर पहुंच गया। जानकारों का मानना है कि राजनीतिक घटनाओं और घरेलू फैक्टर्स से बाजार को कुछ सपोर्ट मिल रहा है, लेकिन असली दबाव वैश्विक कारणों से बना हुआ है।
आगे क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट्स
विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले दिनों में रुपये पर दबाव बना रह सकता है। डॉलर की मांग और तेल की ऊंची कीमतें इसे और कमजोर कर सकती हैं। अनुमान है कि रुपया जल्द ही 95.50 से 97 के स्तर तक भी जा सकता है। अगर वैश्विक हालात नहीं सुधरे, तो गिरावट का सिलसिला जारी रह सकता है।