भारतीय रुपये की मजबूती अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में साफ दिखाई दे रही है। जहां साल 2022 तक भारत केवल 18 देशों के साथ रुपये में कारोबार करता था, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 34 तक पहुंच गई है। इसका मतलब है कि भारत की मुद्रा की स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है और अब ज्यादा देश भारतीय रुपये में व्यापार करने को तैयार हैं। फॉरेक्स एक्सचेंज डीलर एसोसिएशन के आंकड़े हाल ही में आरबीआई और निर्यातकों की बैठक में साझा किए गए, जिसमें बताया गया कि रुपये का वैश्विक दायरा तेज़ी से बढ़ रहा है।
डॉलर पर निर्भरता कम होने की उम्मीद
निर्यातकों का मानना है कि रुपये की अंतरराष्ट्रीय पहुंच से भारत को कई आर्थिक लाभ होंगे। सबसे बड़ा फायदा यह कि व्यापार में डॉलर पर निर्भरता कम हो जाएगी। डॉलर की कीमतें और अंतरराष्ट्रीय भुगतान अक्सर राजनीतिक और आर्थिक तनावों से प्रभावित होते हैं, जिससे व्यापार पर असर पड़ता है। रुपये में कारोबारी चुनौतियां कम होंगी और निर्यातकों के लिए लागत भी घटेगी। इससे भारतीय कारोबारियों को वैश्विक बाजार में मजबूती से पकड़ बनाने में मदद मिलेगी।
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रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद बढ़ी जरूरत
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं को वैकल्पिक व्यापार मॉडल खोजने पड़े। इसी दौरान रुपये के अंतरराष्ट्रीयकरण की दिशा में भारत ने तेज़ी दिखाई। रुपये में व्यापार बढ़ने से न सिर्फ जोखिम कम हुआ है, बल्कि भुगतान प्रक्रिया भी सरल हुई है। भारतीय उद्योग जगत के लिए यह एक बड़ा कदम है क्योंकि इससे व्यापार लागत कम होती है और भारतीय कंपनियों को प्रतिस्पर्धा में बढ़त मिलती है। रुपये की बढ़ती स्वीकार्यता यह दिखाती है कि भारत आर्थिक रूप से अधिक मजबूत और आत्मनिर्भर बन रहा है।
किन देशों के साथ हो रहा रुपये में व्यापार
भारत अब ऑस्ट्रेलिया, चीन, जापान, जर्मनी, रूस, यूएई, सिंगापुर, बांग्लादेश, श्रीलंका, दक्षिण कोरिया और यूनाइटेड किंगडम जैसे बड़े देशों के साथ भी रुपये में सीधे व्यापार कर रहा है। इसके अलावा बेलारूस, फिजी, गुयाना, इंडोनेशिया, कजाकिस्तान, मालदीव, मॉरीशस, ओमान, कतर, तंजानिया, युगांडा और अमेरिका तक भी भारतीय रुपये की पहुंच बन चुकी है। इस तेजी से बढ़ती स्वीकार्यता के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय रुपये को एक स्थिर और विश्वसनीय मुद्रा के रूप में देखा जाने लगा है।