मार्च 2026 वैश्विक आर्थिक उथल-पुथल से भरा रहा और इसका सीधा असर भारतीय मुद्रा पर पड़ा। Indian Rupee अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 95 के पार पहुंच गया, जो एक ऐतिहासिक स्तर है। पूरे वित्त वर्ष में करीब 9.88% की गिरावट ने इसे पिछले कई सालों की सबसे बड़ी कमजोरी बना दिया। मिडिल ईस्ट तनाव और बढ़ते आयात बिल ने रुपये पर दबाव बढ़ाया।
अफगानी ने दिखाया उल्टा ट्रेंड
वहीं Afghan Afghani ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। अफगानिस्तान के केंद्रीय बैंक के अनुसार, उनकी मुद्रा डॉलर के मुकाबले मजबूत हुई और मार्च के अंत तक स्थिर बनी रही। भले ही महीने की शुरुआत में थोड़ी गिरावट आई, लेकिन कुल मिलाकर अफगानी ने रुपये के मुकाबले मजबूती दिखाई।
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ताजा एक्सचेंज रेट क्या कहते हैं
मार्च के आखिर में 1 भारतीय रुपया लगभग 0.67 अफगानी के बराबर रहा। यानी यूनिट वैल्यू के लिहाज से भी रुपया अफगानी से कमजोर नजर आया। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि मुद्रा की ताकत सिर्फ एक्सचेंज रेट से तय नहीं होती, बल्कि अर्थव्यवस्था के आकार और स्थिरता से भी जुड़ी होती है।
क्यों कमजोर हुआ रुपया, क्यों टिका अफगानी
रुपये पर दबाव के पीछे विदेशी निवेश की निकासी, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक तनाव बड़ी वजह रहे। वहीं अफगानिस्तान ने सख्त मौद्रिक नीतियों, डॉलर की नियंत्रित सप्लाई और सीमित वैश्विक जुड़ाव के कारण अपनी मुद्रा को स्थिर बनाए रखा। कुल मिलाकर मार्च 2026 में जहां रुपया दबाव में रहा, वहीं अफगानी अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में दिखाई दिया।