वैश्विक तनाव और मिडिल ईस्ट में अनिश्चितता के बीच भारतीय रुपया हल्की कमजोरी के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में 1 डॉलर की कीमत करीब 92.66 रुपये रही। वहीं पाकिस्तान की करेंसी की बात करें तो 1 डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपया लगभग 279.02 पर बना हुआ है। दोनों देशों की करेंसी पर वैश्विक हालात, खासकर ईरान और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी स्थिति का असर साफ देखा जा रहा है।
भारतीय रुपया क्यों माना जाता है मजबूत
अगर सीधी तुलना करें तो भारतीय रुपया पाकिस्तानी रुपये से काफी मजबूत है। मौजूदा समय में 1 भारतीय रुपया करीब 3 पाकिस्तानी रुपये के बराबर है। इसका मतलब है कि समान मूल्य के लिए पाकिस्तान को ज्यादा मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। यह अंतर दोनों देशों की आर्थिक स्थिरता, विदेशी मुद्रा भंडार और निवेश माहौल को दर्शाता है, जहां भारत की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर मानी जाती है।
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आर्थिक हालात से तय होती है ताकत
किसी भी देश की करेंसी की मजबूती उसकी अर्थव्यवस्था पर निर्भर करती है। भारत में जहां ग्रोथ स्थिर बनी हुई है और निवेश का माहौल मजबूत है, वहीं पाकिस्तान आर्थिक संकट, बढ़ते कर्ज और कमजोर विदेशी मुद्रा भंडार जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। यही वजह है कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारतीय रुपया अपेक्षाकृत संतुलित बना हुआ है।
पाकिस्तान पर संकट की दोहरी मार
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इस समय गंभीर दबाव में है। महंगाई तेजी से बढ़ रही है और कर्ज का बोझ लगातार भारी होता जा रहा है। ऊपर से मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है, जिससे ईंधन की कीमतें बढ़ गई हैं। हालात ऐसे हैं कि पेट्रोल-डीजल के लिए लंबी कतारें लग रही हैं, जो आर्थिक संकट की गंभीरता को दिखाता है।