देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने भले ही हाल ही में 6 इंटरनेशनल रूट्स पर उड़ानें अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला किया हो, लेकिन कंपनी का दावा है कि उसका भविष्य का प्लान पहले से भी बड़ा है। इंडिगो ने वित्त वर्ष 2030 तक अपने कारोबार को लगभग दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। कंपनी का कहना है कि वह आने वाले वर्षों में सिर्फ भारत की नहीं बल्कि दुनिया की बड़ी एविएशन कंपनियों में शामिल होना चाहती है। इसी लक्ष्य को लेकर कंपनी ने अपना नया रोडमैप पेश किया है।
20 करोड़ यात्रियों का लक्ष्य
इंडिगो का कहना है कि 2030 तक वह हर साल लगभग 20 करोड़ यात्रियों को सेवा देना चाहती है। अभी यह संख्या करीब 12.3 करोड़ है। कंपनी रोजाना उड़ानों की संख्या भी 2200 से बढ़ाकर करीब 3000 करने की तैयारी में है। इसके अलावा इंडिगो अपने विमान बेड़े को भी तेजी से बढ़ाएगी और 550 से ज्यादा विमानों के साथ संचालन करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
इंटरनेशनल विस्तार पर फोकस
इंडिगो की सबसे बड़ी रणनीति अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से विस्तार करना है। कंपनी का अनुमान है कि 2030 तक उसकी कुल क्षमता का करीब 40 फीसदी हिस्सा इंटरनेशनल उड़ानों से आएगा। पिछले कुछ वर्षों में इंडिगो का विदेशी नेटवर्क तेजी से बढ़ा है। जहां 2016 में उसके पास सिर्फ 5 अंतरराष्ट्रीय गंतव्य थे, वहीं अब यह संख्या 44 तक पहुंच चुकी है। कंपनी एशिया, यूरोप, अफ्रीका और मध्य एशिया के नए शहरों को जोड़ने की तैयारी कर रही है।
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लंबी दूरी की उड़ानों की तैयारी
इंडिगो जल्द नए और आधुनिक विमानों को अपने बेड़े में शामिल करेगी। एयरबस A321XLR और एयरबस A350 जैसे विमान कंपनी की लंबी दूरी की रणनीति का हिस्सा होंगे। इन विमानों की मदद से एथेंस, इस्तांबुल, बाली और सियोल जैसे शहरों तक सीधी उड़ानें शुरू करने की योजना है। इससे इंडिगो को उन बाजारों में भी प्रवेश मिलेगा जहां अब तक उसकी पहुंच सीमित रही है।
प्रीमियम यात्रियों पर नजर
अब तक कम लागत वाली एयरलाइन के रूप में पहचान रखने वाली इंडिगो प्रीमियम यात्रियों पर भी ध्यान बढ़ा रही है। कंपनी की ‘इंडिगो स्ट्रेच’ सेवा के जरिए बिजनेस और प्रीमियम वर्ग के यात्रियों को बेहतर सुविधाएं दी जा रही हैं। मार्च 2027 तक प्रीमियम सीटों की संख्या 2800 से बढ़ाकर 4300 से ज्यादा करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे कंपनी की कमाई बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कार्गो और नई कमाई पर जोर
इंडिगो सिर्फ टिकट बिक्री पर निर्भर नहीं रहना चाहती। कंपनी कार्गो कारोबार और दूसरी सेवाओं से होने वाली कमाई बढ़ाने पर भी काम कर रही है। 2030 तक कार्गो वॉल्यूम को 4.5 लाख टन से ऊपर ले जाने की योजना है। इसके साथ ही लॉयल्टी प्रोग्राम, अतिरिक्त सेवाएं और तकनीक आधारित सुविधाओं से भी कमाई बढ़ाने की तैयारी है। कंपनी का कहना है कि विस्तार तेज होगा, लेकिन आर्थिक अनुशासन और लागत नियंत्रण उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी रहेगी।