Internal Infighting in TMC Escalates: पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस में जारी अंदरूनी खींचतान के बीच पार्टी को एक और बड़ा झटका लगा है। टीएमसी के माइनॉरिटी सेल के प्रदेश अध्यक्ष और इटाहार से विधायक मोशरेफ हुसैन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले को पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और गुटबाजी से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि वह जल्द ही पार्टी के बागी खेमे के साथ खुलकर खड़े हो सकते हैं।
बागी गुट में शामिल होने की अटकलें
सूत्रों के मुताबिक मोशरेफ हुसैन का नाम उन नेताओं में शामिल किया जा रहा है जो हाल के दिनों में पार्टी नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि वह बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले समूह के करीब पहुंच सकते हैं। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन उनके इस्तीफे ने राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है।
विधानसभा में खुलकर दिखी गुटबाजी
पश्चिम बंगाल विधानसभा के बजट सत्र के दौरान टीएमसी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आए थे। सदन में पार्टी के विधायक अलग-अलग समूहों में बैठे दिखाई दिए। एक ओर ऋतब्रत बनर्जी और उनके समर्थकों का बड़ा समूह नजर आया, जबकि दूसरी ओर पार्टी नेतृत्व के प्रति वफादार माने जाने वाले नेताओं का अलग खेमा मौजूद था। इस घटनाक्रम ने पार्टी की एकजुटता को लेकर सवाल खड़े कर दिए थे।
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वरिष्ठ नेताओं की भूमिका पर नजर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीएमसी के भीतर चल रही उठापटक में कई वरिष्ठ नेताओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। विधानसभा सत्र के दौरान कई बड़े नेताओं के अलग-अलग खेमों में दिखाई देने से यह संकेत मिला कि पार्टी के अंदर असंतोष का दायरा बढ़ रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व के सामने संगठनात्मक चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।
संसद तक पहुंचा सियासी संकट
बताया जा रहा है कि पार्टी के भीतर मतभेद केवल राज्य राजनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका असर राष्ट्रीय स्तर पर भी देखने को मिल रहा है। कुछ सांसदों और नेताओं के अलग रुख अपनाने की खबरों ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दिया है। फिलहाल टीएमसी नेतृत्व की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन मोशरेफ हुसैन के इस्तीफे ने पार्टी की आंतरिक स्थिति को लेकर नई बहस छेड़ दी है।