मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने भारत की ऊर्जा व्यवस्था पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है। खासकर एलपीजी की सप्लाई पर इसका प्रभाव साफ दिख रहा है, जिससे आम लोगों से लेकर होटल और उद्योग तक परेशानी झेल रहे हैं। कई जगहों पर गैस की कमी के कारण कामकाज प्रभावित होने लगा है, जिससे संकट की गंभीरता बढ़ गई है।
सप्लाई चेन पर पड़ा सीधा असर
भारत की एलपीजी आपूर्ति का बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आता रहा है, जो अब संघर्ष के कारण प्रभावित हो रहा है। इस अहम समुद्री मार्ग में बाधा आने से देश में गैस की उपलब्धता पर दबाव बढ़ गया है। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, हालात पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो चुके हैं और सप्लाई को स्थिर रखना बड़ी चुनौती बन गया है।
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भारत ने बदली रणनीति
इस संकट से निपटने के लिए भारत ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अब देश अमेरिका से एलपीजी आयात कर रहा है ताकि कमी को पूरा किया जा सके। इसके साथ ही एलएनजी की सप्लाई ऑस्ट्रेलिया और रूस जैसे देशों से सुनिश्चित की जा रही है। सरकार वैकल्पिक स्रोतों और रूट्स पर तेजी से काम कर रही है, जिससे किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो सके।
जमीन पर क्या है हालात
सरकारी प्रयासों के बावजूद कई जगहों पर एलपीजी की किल्लत बनी हुई है। हालांकि ऑनलाइन बुकिंग में सुधार देखा गया है और अधिकांश उपभोक्ता डिजिटल माध्यम अपना रहे हैं, लेकिन कई इलाकों में अब भी लोगों को लंबी कतारों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और होम डिलीवरी का इंतजार करें।
वैश्विक तनाव ने बढ़ाई चिंता
ईरान को लेकर अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई के बाद हालात और गंभीर हो गए हैं। अब संघर्ष का फोकस ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर आ गया है, जहां तेल और गैस से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है। ऐसे में वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है, जिसका असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है।