ईरान के लिए खर्ग द्वीप केवल एक जमीन का टुकड़ा नहीं बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था का आधार है। खर्ग द्वीप से देश का लगभग 90 प्रतिशत तेल निर्यात होता है। यानी यह द्वीप ईरान की कमाई का सबसे बड़ा जरिया है। अगर यहां से सप्लाई रुकती है तो देश की आर्थिक हालत पर सीधा असर पड़ सकता है और सरकार की आय लगभग ठहर सकती है।
तेल निर्यात पर पूरी निर्भरता
ईरान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से तेल पर टिकी हुई है। विदेशी मुद्रा कमाने का सबसे बड़ा साधन यही है और सरकारी खर्च का बड़ा हिस्सा भी इसी से चलता है। ऐसे में खर्ग द्वीप का महत्व और बढ़ जाता है। अगर यहां किसी तरह की रुकावट आती है तो न सिर्फ व्यापार बल्कि पूरे देश का आर्थिक संतुलन बिगड़ सकता है।
भौगोलिक स्थिति से मिला फायदा
इस द्वीप की सबसे बड़ी खासियत इसकी लोकेशन है। यह ईरानी तट से करीब 28 किलोमीटर दूर है और इसके आसपास गहरा समुद्र है। यही वजह है कि बड़े तेल टैंकर आसानी से यहां पहुंचते हैं। ईरान के बाकी तटीय इलाकों में पानी उथला है, जिससे बड़े जहाजों का आना मुश्किल होता है। इसलिए तेल निर्यात का पूरा भार इसी एक जगह पर आ गया है।
ये भी पढ़ें : अप्रैल में ट्रेनों पर ब्रेक, 20 दिन तक कैंसिल रहेंगी कई गाड़ियां, कहीं आपकी यात्रा भी तो नहीं फंसने वाली?
चीन के साथ जुड़ा बड़ा व्यापार
ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीदार चीन है। प्रतिबंधों के बावजूद चीन सस्ते दाम पर तेल खरीदता रहा है। खर्ग द्वीप से निकलने वाला ज्यादातर तेल सीधे एशियाई बाजारों तक पहुंचता है। यही वजह है कि यह द्वीप सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार का भी अहम केंद्र बन गया है।
हमले की आशंका से बढ़ा खतरा
हाल के तनावों के बीच डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इस द्वीप को निशाना बनाने की चेतावनी ने चिंता बढ़ा दी है। अगर यहां हमला होता है तो रोजाना 1.5 से 2 करोड़ बैरल तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इससे वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
ताकत भी और सबसे बड़ी कमजोरी भी
खर्ग द्वीप ईरान के लिए एक तरफ सबसे बड़ी ताकत है तो दूसरी तरफ सबसे बड़ा जोखिम भी। पूरी तेल व्यवस्था एक ही जगह केंद्रित होने से खतरा कई गुना बढ़ जाता है। अगर यह सुरक्षित रहता है तो अर्थव्यवस्था चलती रहेगी, लेकिन अगर यहां कोई बड़ा हमला होता है तो इसका असर सिर्फ ईरान नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर दिखाई