अमेरिका ने ईरान के कच्चे तेल पर लगी पाबंदियों में अस्थायी राहत देने का फैसला किया है। इससे भारत के लिए ईरान से तेल खरीदने का रास्ता खुल सकता है। यह खबर सिर्फ विदेश नीति तक सीमित नहीं है क्योंकि इसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों से लेकर रसोई के बजट तक पहुंच सकता है। हालांकि यह छूट सीमित समय के लिए बताई जा रही है इसलिए भारत को तेजी से फैसला लेना होगा।
पहले क्यों बंद हुई खरीदारी
साल 2018 के बाद अमेरिका ने ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे। भारत को भी ईरान से तेल खरीदना बंद करना पड़ा। इससे पहले ईरान भारत के बड़े तेल सप्लायर्स में शामिल था। भारत हर दिन लाखों बैरल ईरानी तेल खरीदता था। इसके बाद भारत ने इराक सऊदी अरब और रूस से खरीद बढ़ाई। अब ईरान का विकल्प फिर खुलता है तो भारत के पास तेल खरीद के लिए एक और मजबूत रास्ता होगा।
सस्ते तेल से घट सकता खर्च
ईरानी कच्चा तेल अक्सर ब्रेंट क्रूड के मुकाबले सस्ता माना जाता है। अगर भारत को बेहतर रेट और आसान शिपिंग टर्म्स मिलते हैं तो तेल आयात का बिल कम हो सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेश से खरीदता है। इसलिए कुछ डॉलर प्रति बैरल की बचत भी करोड़ों डॉलर का फायदा दे सकती है। इससे विदेशी मुद्रा बचेगी और रुपये पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
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पेट्रोल-डीजल पर कैसे पड़ेगा असर
कच्चा तेल सस्ता होने से तेल कंपनियों की लागत कम हो सकती है। इसका मतलब यह नहीं कि पेट्रोल-डीजल तुरंत सस्ता हो जाएगा क्योंकि टैक्स और कंपनियों की कीमत नीति भी अहम होती है। लेकिन सरकार और कंपनियों के पास राहत देने की गुंजाइश बढ़ सकती है। तेल की कीमत कम रहने से ट्रांसपोर्ट खर्च भी कम हो सकता है। इससे सब्जी दूध राशन और रोजमर्रा के सामान की महंगाई पर भी दबाव घट सकता है।
रूस पर निर्भरता होगी कम
भारत अभी रूस इराक और सऊदी अरब जैसे बड़े सप्लायर्स से काफी तेल खरीदता है। किसी एक देश पर ज्यादा निर्भर रहना ऊर्जा सुरक्षा के लिए जोखिम बन सकता है। ईरान की वापसी से भारत के पास ज्यादा विकल्प होंगे। अगर रूस से सप्लाई महंगी होती है या मिडिल ईस्ट में कोई संकट बढ़ता है तो भारत ईरानी तेल का सहारा ले सकता है। भारतीय रिफाइनरियां भी ईरानी क्रूड को प्रोसेस करने में सक्षम हैं।
राहत सीमित है इसलिए चुनौती बड़ी
यह छूट अगस्त 2026 तक सीमित बताई जा रही है। इतने कम समय में शिपिंग बीमा भुगतान और लॉजिस्टिक्स की व्यवस्था करना आसान नहीं होगा। भारत को यह भी देखना होगा कि अमेरिकी प्रतिबंधों की बाकी शर्तों का उल्लंघन न हो। अगर शांति समझौता टिकता है और छूट आगे बढ़ती है तो भारत को बड़ा फायदा मिल सकता है। फिलहाल ईरानी तेल का रास्ता खुलना भारत के लिए राहत की खबर जरूर है लेकिन पेट्रोल-डीजल सस्ता होने का फैसला बाजार और सरकार की अगली चाल पर निर्भर करेगा।