ईरान में सत्ता के खिलाफ उठी आवाज अब और तेज हो गई है। साल 2025 के अंत में शुरू हुआ यह विरोध अब 2026 में भी जारी है और चौथे दिन तक फैल चुका है। बुधवार को देशभर में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। कई शहरों में लोग सड़कों पर उतरे और रैलियां निकालीं। प्रदर्शनकारी अब सिर्फ नाराजगी नहीं जता रहे, बल्कि खुलकर सत्ता में बदलाव की मांग कर रहे हैं। यह आंदोलन धीरे-धीरे पूरे देश को अपनी चपेट में लेता नजर आ रहा है।
इक्कीस प्रांतों तक फैला आंदोलन, कई शहरों में नारेबाजी
इस विरोध प्रदर्शन का दायरा लगातार बढ़ रहा है। इस्फ़हान, हमादान, बाबोल, देहलोरन, बाघमलेक और पियान जैसे शहरों में हजारों लोग सड़कों पर दिखाई दिए। प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के खिलाफ नारे लगाए और निर्वासित राजकुमार रज़ा पहलवी के समर्थन में आवाज बुलंद की। कई जगहों पर पिछले आंदोलनों में मारे गए लोगों को याद किया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब यह आंदोलन ईरान के 21 प्रांतों तक पहुंच चुका है, जो इसे हाल के वर्षों का सबसे बड़ा जनआंदोलन बना रहा है।
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महंगाई और गिरती अर्थव्यवस्था बनी विरोध की बड़ी वजह
ईरान में चल रहे इस विद्रोह की जड़ में गहरा आर्थिक संकट है। दिसंबर 2025 से हालात और बिगड़ते चले गए। ईरानी रियाल डॉलर के मुकाबले अपने ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया है। महंगाई दर करीब 42 फीसदी तक पहुंच चुकी है, जिससे आम लोगों का जीवन बेहद मुश्किल हो गया है। रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इसी आर्थिक दबाव ने लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया। यह आंदोलन 2022 के महसा अमीनी आंदोलन के बाद सबसे बड़ा माना जा रहा है। इसकी शुरुआत 28 दिसंबर को तेहरान के ग्रैंड बाजार में दुकानदारों की हड़ताल से हुई थी।
बल प्रयोग के बावजूद प्रदर्शन जारी, समर्थन भी बढ़ा
प्रदर्शन को दबाने के लिए सुरक्षा बलों ने कई इलाकों में सख्ती दिखाई। नाहवंद, असदाबाद और हमादान जैसे शहरों में आंसू गैस और गोलीबारी की खबरें सामने आईं। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे हटते नजर नहीं आए। तेहरान में यूनिवर्सिटी की छात्र नेता सरीरा करीमी को हिरासत में लिए जाने की खबर भी आई है, जिनका अब तक कोई पता नहीं चला है। इस आंदोलन को धार्मिक और सांस्कृतिक हस्तियों का समर्थन भी मिलने लगा है। सुन्नी मौलाना मोलावी अब्दोलहामिद ने खराब जीवन स्तर को विद्रोह की वजह बताया, वहीं फिल्ममेकर जाफर पनाही ने इसे जनता के दर्द की आवाज कहा। पश्चिमी नेताओं ने भी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में बयान दिए हैं।