जनवरी 2026 में ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। पिछले कई हफ्तों से लाखों लोग सरकार के खिलाफ सड़कों पर हैं। महंगाई, भ्रष्टाचार और सख्त नीतियों से नाराज जनता खुलकर विरोध कर रही है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक 2000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। कई इलाकों में संचार सेवाएं रोकी गईं और बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां हुईं।
ट्रंप के बयान से बढ़ी हलचल
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के प्रदर्शनकारियों के लिए मदद रास्ते में है। इस बयान के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। क्या अमेरिका ईरान पर सीधी सैन्य कार्रवाई करेगा या फिर किसी और तरीके से दबाव बनाएगा। ट्रंप ने साफ चेतावनी दी है कि अगर ईरान में प्रदर्शनकारियों को फांसी दी गई तो अमेरिका बेहद सख्त कदम उठाएगा। ईरान सरकार ने इन बयानों को बाहरी हस्तक्षेप बताया है।
हवाई हमले की आशंका
ट्रंप को ईरान को लेकर सैन्य विकल्पों की जानकारी दी जा चुकी है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि बातचीत को प्राथमिकता दी जाएगी, लेकिन जरूरत पड़ने पर सीमित हवाई कार्रवाई भी हो सकती है। ट्रंप के लगातार बयानों से यह संकेत मिल रहा है कि उन्होंने खुद को इस संकट से जोड़ लिया है। अगर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्ती और बढ़ी तो अमेरिका पर कार्रवाई का दबाव और तेज हो सकता है। हालांकि इससे बड़ा संघर्ष छिड़ने का खतरा भी बना रहेगा।
जमीनी कार्रवाई क्यों मुश्किल
ईरान में सीधे सैनिक भेजने की संभावना बहुत कम मानी जा रही है। जानकारों का कहना है कि ईरान का भौगोलिक ढांचा और वहां की सुरक्षा ताकतें किसी भी जमीनी अभियान को बेहद जोखिम भरा बना देती हैं। ऐसे कदम से बड़े नुकसान की आशंका है। इसलिए अमेरिका गुप्त अभियानों, तकनीकी हमलों और सीमित सैन्य दबाव जैसे विकल्पों पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। फिलहाल जमीन पर उतरने की कोई ठोस तैयारी नजर नहीं आती।
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रजा पहलवी की वापसी की चर्चा
ईरान के आखिरी शाह के बेटे रजा पहलवी निर्वासन में रहते हुए विरोध प्रदर्शनों का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने ईरान लौटने के संकेत दिए हैं और जनता से आंदोलन जारी रखने की अपील की है। उनका कहना है कि देश में लोकतांत्रिक बदलाव होना चाहिए। अगर मौजूदा सत्ता कमजोर पड़ती है तो उनकी वापसी संभव मानी जा रही है, हालांकि ईरान की ताकतवर संस्थाएं इसे आसान नहीं बनने देंगी।
आगे क्या होगा
ट्रंप की ओर से कही गई मदद अभी शब्दों तक सीमित है, लेकिन हालात तेजी से बदल रहे हैं। अमेरिका शासन परिवर्तन चाहता है, लेकिन खुला युद्ध नहीं। ईरान की स्थिति बेहद अनिश्चित है। हवाई कार्रवाई की आशंका बनी हुई है, जमीनी कदम दूर नजर आते हैं और रजा पहलवी की वापसी सत्ता के गिरने पर निर्भर करती है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें ट्रंप के अगले कदम और ईरान की सड़कों पर उमड़ते जनसैलाब पर टिकी हुई हैं।