पश्चिम बंगाल सरकार ने मतदाता सूचियों की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया से जुड़े नए आंकड़े जारी किए हैं। सरकार के मुताबिक अब तक राज्य में 11000 से ज्यादा अवैध मतदाताओं की पहचान की जा चुकी है। यह जानकारी एसआईआर से जुड़ी सुनवाई के दौरान सामने आई है। हालांकि इन आंकड़ों पर अब तक निर्वाचन आयोग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
कहां मिले सबसे ज्यादा और कहां एक भी नहीं
जिला स्तर पर देखें तो नदिया में सबसे ज्यादा 9228 अवैध मतदाता पाए गए हैं। इसके उलट दक्षिण कोलकाता और बांकुड़ा में अब तक एक भी अवैध मतदाता सामने नहीं आया है। दक्षिण कोलकाता में 136561 और बांकुड़ा में 163357 नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन जांच के बाद सभी मतदाता सही पाए गए।
कैसे हुई पहचान और कितनी सुनवाई पूरी
राज्य सरकार के अनुसार अब तक 930993 मतदाताओं की सुनवाई पूरी हो चुकी है और उनकी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर दी गई है। दस्तावेजों की जांच और सुनवाई के बाद निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों ने 11472 मतदाताओं को अवैध घोषित किया है। इन नामों को अंतिम मतदाता सूची से हटाया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया मतदाता सूची को शुद्ध करने के उद्देश्य से की जा रही है।
नोटिस और जांच का पूरा हिसाब
एसआईआर के तहत पूरे राज्य में 6578058 नोटिस तैयार किए गए हैं। इनमें से 3249091 नोटिस पहले ही जारी किए जा चुके हैं। जिन 930993 मतदाताओं को नोटिस मिला था, उनकी सुनवाई पूरी हो गई है। इसी दौरान अवैध मतदाताओं की पहचान की गई। बाकी मतदाताओं की सुनवाई अभी जारी है।
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अन्य जिलों में क्या स्थिति रही
आंकड़ों के अनुसार कूचबिहार में 10, जलपाईगुड़ी में 4, दार्जिलिंग में 2, उत्तर दिनाजपुर में 2 और दक्षिण दिनाजपुर में 195 अवैध मतदाता पाए गए। इसके अलावा मालदा में 15, मुर्शिदाबाद में 68, उत्तर 24 परगना में 147 और दक्षिण 24 परगना में 69 नाम हटाने की तैयारी है। हुगली में 989, पूर्व बर्धमान में 167 और बीरभूम में 264 अवैध मतदाता चिन्हित किए गए हैं।
राजनीति भी हुई तेज
एसआईआर प्रक्रिया अब राज्य में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है। विपक्षी दलों का कहना है कि इससे फर्जी मतदाताओं की पहचान होगी, जबकि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने प्रक्रिया के तरीके पर सवाल उठाए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद यह बहस और तेज हो सकती है, क्योंकि सबकी नजर इस बात पर है कि अवैध मतदाताओं की संख्या में आगे कोई बदलाव होता है या नहीं।