मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने अब वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। World Bank की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, हालात बिगड़ने पर दुनिया भर में करीब 4.5 करोड़ लोग भुखमरी की कगार पर पहुंच सकते हैं। यह चेतावनी ऐसे समय आई है, जब कई देश पहले से महंगाई, जलवायु संकट और आर्थिक दबाव से जूझ रहे हैं। विशेषज्ञ इसे केवल क्षेत्रीय संकट नहीं, बल्कि संभावित वैश्विक आपदा मान रहे हैं।
सप्लाई चेन पर सबसे बड़ा खतरा
रिपोर्ट के अनुसार, Iran के आसपास बढ़ता तनाव वैश्विक सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। Strait of Hormuz इस संकट का केंद्र बन सकता है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल, अनाज और उर्वरक गुजरता है। यदि यह मार्ग बाधित होता है, तो न केवल ऊर्जा बल्कि खाद्य आपूर्ति भी प्रभावित होगी, जिससे कीमतों में तेज उछाल आ सकता है।
गरीब देशों पर सबसे ज्यादा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सबसे ज्यादा असर उन देशों पर पड़ेगा, जो पहले से आर्थिक रूप से कमजोर हैं। महंगे खाद्यान्न और सीमित उपलब्धता के कारण कुपोषण और सामाजिक अस्थिरता का खतरा बढ़ जाएगा। अगर यह संकट लंबा खिंचता है, तो वैश्विक खाद्य सुरक्षा कई साल पीछे जा सकती है और कई देशों में हालात अकाल जैसे बन सकते हैं।
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ऊर्जा और खाद्य का गहरा संबंध
रिपोर्ट में ‘एनर्जी-फूड लिंक’ को लेकर खास चेतावनी दी गई है। तेल और गैस की कीमतें बढ़ने से खेती की लागत सीधे प्रभावित होती है। उर्वरक उत्पादन, सिंचाई, कटाई और परिवहन—हर स्तर पर ऊर्जा की जरूरत होती है। जब ईंधन महंगा होता है, तो किसानों के लिए उत्पादन लागत बढ़ जाती है, जिससे अनाज की आपूर्ति घट सकती है और कीमतें तेजी से बढ़ती हैं।
रसोई तक पहुंचता है युद्ध का असर
युद्ध का असर केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आम लोगों की रसोई तक पहुंचता है। परिवहन महंगा होने से रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ जाते हैं। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस संकट को गंभीरता से लिया जा रहा है। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो यह संकट दुनिया के लिए एक बड़ी मानवीय चुनौती बन सकता है।