मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष ने दुनिया की अर्थव्यवस्था को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं। अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई से हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। इस टकराव में कई लोगों की जान जाने की खबरें सामने आई हैं और इसका असर अब वैश्विक बाजारों पर भी दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है और कई साल बाद क्रूड ऑयल 100 डॉलर के पार पहुंचकर लगभग 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। ऐसे में ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है और कई देशों के लिए आर्थिक जोखिम की आशंका जताई जा रही है।
वैश्विक एजेंसी की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
एक अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी की नई रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान से जुड़ा यह संघर्ष कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है। रिपोर्ट के अनुसार तेल और गैस के आयात पर निर्भर देशों पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा विदेशों में काम करने वाले लोगों द्वारा भेजी जाने वाली धनराशि और मुद्रा विनिमय दर पर भी असर पड़ सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा आपूर्ति बाधित होती है तो वैश्विक निवेशकों का भरोसा कमजोर हो सकता है और इससे आर्थिक बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है।
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तेल महंगा होने से बढ़ सकता है आर्थिक दबाव
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अगर ऊर्जा की कीमतें लगातार बढ़ती रहती हैं तो इससे महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। महंगे तेल का असर परिवहन और उद्योगों की लागत पर पड़ता है, जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में कई देशों को अपनी आर्थिक नीतियों में बदलाव करना पड़ सकता है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कर्ज जुटाना भी मुश्किल हो सकता है, क्योंकि ऐसी परिस्थितियों में डॉलर मजबूत हो सकता है और उधार लेने की लागत बढ़ सकती है।
लंबा संघर्ष बना तो असर और गंभीर हो सकता है
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर यह संघर्ष लंबे समय तक चलता है तो असर और ज्यादा गंभीर हो सकता है। खासकर उन देशों पर ज्यादा दबाव पड़ सकता है जो तेल और गैस के आयात पर ज्यादा निर्भर हैं। भारत जैसे देशों में ऊर्जा आयात का बड़ा हिस्सा विदेशों से आता है, इसलिए वहां भी लागत बढ़ने की आशंका बनी रहती है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर आपूर्ति में रुकावट कम समय के लिए रहती है तो जोखिम सीमित रह सकता है। लेकिन अगर स्थिति लंबी चली तो कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए चुनौती और बढ़ सकती है।