मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब सिर्फ तेल और गैस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाली चीजों तक पहुंच गया है। सप्लाई चेन में आई रुकावट और कच्चे माल की बढ़ती लागत ने कई उद्योगों का गणित बिगाड़ दिया है। हाल ही में Indian Oil Corporation Limited द्वारा प्लास्टिक से जुड़े पॉलिमर के दाम बढ़ाने के बाद महंगाई का असर और स्पष्ट हो गया है।
प्लास्टिक महंगा, रोजमर्रा का सामान भी प्रभावित
पॉलिमर की कीमतों में तेज उछाल से पैकेज्ड फूड, बोतलबंद पानी, जूस और घरेलू प्लास्टिक सामान महंगे हो सकते हैं। पॉलीप्रोपाइलीन और पॉलीइथिलीन जैसे कच्चे माल की कीमतों में हजारों रुपये प्रति टन की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इनका इस्तेमाल पैकेजिंग, कंटेनर, बाल्टी और बोतलों में होता है, इसलिए इसका सीधा असर आम उपभोक्ता पर पड़ना तय है।
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कंपनियों का बढ़ता खर्च, ग्राहकों पर बोझ
इनपुट कॉस्ट बढ़ने से कंपनियों के सामने दो विकल्प हैं—या तो उत्पाद महंगे करें या पैकेजिंग का आकार छोटा कर दें। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही कीमतें तुरंत न बढ़ें, लेकिन आने वाले समय में इसका असर उपभोक्ताओं पर जरूर पड़ेगा। भारत जैसे देश में, जहां सस्ती पैकेजिंग का बड़ा हिस्सा प्लास्टिक पर निर्भर है, यह असर और ज्यादा महसूस होगा।
दवाइयों और अस्पतालों पर भी असर
महंगाई की यह लहर हेल्थ सेक्टर तक पहुंच चुकी है। सिरिंज, आईवी बोतल, डायग्नोस्टिक किट और दवाइयों की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाला प्लास्टिक महंगा हो गया है। Association of Indian Medical Device Industry के अनुसार, लागत में 50-60% तक बढ़ोतरी से मेडिकल उपकरणों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली जरूरी चीजें भी महंगी हो सकती हैं, जिससे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा।