अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत के व्यापार पर भी दिखाई देने लगा है। खास तौर पर पश्चिम एशिया की ओर जाने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से फल और सब्जियों के निर्यात पर बड़ा असर पड़ा है। केला, अंगूर, प्याज और तरबूज जैसे कई उत्पाद बंदरगाहों पर फंसे हुए हैं। इससे किसानों और निर्यातकों को भारी नुकसान होने की आशंका बढ़ गई है।
बंदरगाहों पर फंसे सैकड़ों कंटेनर
स्थिति यह है कि कई बंदरगाहों पर फलों और सब्जियों से भरे कंटेनर खड़े रह गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी में ही सैकड़ों कंटेनर फंसे हुए हैं। वहीं गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर भी कई कंटेनर अटके बताए जा रहे हैं। कुल मिलाकर देशभर में करीब एक हजार कंटेनर ऐसे हैं जिनमें नाशवान फल और सब्जियां रखी हुई हैं।
निर्यातकों को राहत देने का फैसला
इस संकट को देखते हुए जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी ने निर्यातकों के लिए राहत की घोषणा की है। महाराष्ट्र सरकार के मंत्री जयकुमार रावल ने बताया कि बंदरगाह प्रशासन ने फंसे हुए कंटेनरों पर लगने वाले कई शुल्क माफ कर दिए हैं। इसका मकसद यह है कि निर्यातकों और किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।
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स्टोरेज और बिजली शुल्क में बड़ी छूट
घोषणा के मुताबिक कंटेनरों पर लगने वाले ग्राउंड रेंट, स्टोरेज और ड्वेल टाइम जैसे शुल्क पूरी तरह माफ कर दिए गए हैं। इसके अलावा रीफर यानी शीतगृह कंटेनरों के बिजली कनेक्शन शुल्क में भी लगभग 80 प्रतिशत की छूट दी गई है। बंदरगाह पर अतिरिक्त स्टोरेज और कंटेनर रखने की जगह भी उपलब्ध कराई जाएगी ताकि माल सुरक्षित रखा जा सके।
राहत योजना सीमित अवधि के लिए लागू
यह राहत योजना सीमित समय के लिए लागू की गई है। बंदरगाह प्रशासन के अनुसार यह छूट 28 फरवरी 2026 की मध्यरात्रि से लागू मानी जाएगी और 14 मार्च 2026 तक जारी रहेगी। जिन कंटेनरों को यह सुविधा मिलेगी उनमें वे कंटेनर भी शामिल हैं जो 28 फरवरी से टर्मिनल में मौजूद हैं या 8 मार्च सुबह तक बंदरगाह में दाखिल हुए हैं।
किसानों और व्यापारियों के लिए बड़ी मदद
विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला किसानों और निर्यात कारोबार से जुड़े लोगों के लिए काफी राहत देने वाला है। फल और सब्जियां जल्दी खराब होने वाली चीजें होती हैं, इसलिए कंटेनरों के लंबे समय तक बंदरगाह पर फंसे रहने से बड़ा नुकसान हो सकता था। बंदरगाह प्रशासन ने टर्मिनल ऑपरेटरों को निर्देश दिया है कि प्रभावित माल को प्राथमिकता दी जाए और निर्यातकों को हर संभव मदद पहुंचाई जाए।