मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरे में बदलता जा रहा है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते टकराव के चलते ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल तेज हो गई है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर हालात जल्द नहीं संभले, तो आने वाले कुछ हफ्तों में दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है।
होर्मुज बना संकट का सबसे बड़ा केंद्र
दुनिया की करीब 20 फीसदी तेल सप्लाई होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरती है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी तरह की रुकावट पूरे वैश्विक ऊर्जा सिस्टम को झटका दे सकती है। मौजूदा हालात में इसी क्षेत्र को लेकर सबसे ज्यादा चिंता जताई जा रही है।
विशेषज्ञों ने दी चेतावनी
ऊर्जा अर्थशास्त्री अनस अल्हाजी ने कहा है कि अगर युद्ध लंबा चला, तो इसके नतीजे जल्द ही सामने आने लगेंगे। उन्होंने साफ कहा कि कुछ ही हफ्तों में वैश्विक सप्लाई चेन और बाजारों पर इसका असर दिख सकता है, जिससे आर्थिक अस्थिरता बढ़ेगी।
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एशिया और यूरोप पर बढ़ेगा दबाव
यूरोप में ऊर्जा संकट तेजी से गहराने लगा है और वहां कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इससे यूरोपीय देशों को फिर से रूस के ऊर्जा स्रोतों पर निर्भर होना पड़ सकता है। वहीं एशियाई बाजारों में कच्चे तेल की कीमतें पहले ही 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुकी हैं और इसमें और तेजी की आशंका जताई जा रही है।
महंगाई और सप्लाई पर असर
तेल महंगा होने का सीधा असर ट्रांसपोर्ट, उद्योग और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर पड़ता है। अगर कीमतें लगातार बढ़ती रहीं, तो दुनिया भर में महंगाई बढ़ेगी और सप्लाई चेन पर दबाव और गहरा जाएगा। इसका असर आम लोगों की जेब तक पहुंचेगा।
मई तक बिगड़ सकते हैं हालात
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मौजूदा स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो मई तक वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ा झटका देखने को मिल सकता है। ऐसे में दुनिया भर की सरकारें अब हालात पर नजर बनाए हुए हैं और संकट से निपटने के विकल्प तलाश रही हैं।