
ISRO Bahubali rocket: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) एक और ऐतिहासिक मिशन के लिए तैयार है। रविवार, 2 नवंबर को इसरो अपने सबसे भारी संचार उपग्रह CMS-03 को अंतरिक्ष में भेजने जा रहा है। यह उपग्रह करीब 4,410 किलोग्राम वजनी है और इसे एलवीएम3-एम5 (LVM3-M5) रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा, जिसे इसकी ताकत और क्षमता के कारण ‘बाहुबली रॉकेट’ कहा जाता है। यह प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से शाम 5:26 बजे किया जाएगा। इसरो के अनुसार, CMS-03 भारत की धरती से भू-समकालिक स्थानांतरण कक्षा (GTO) में छोड़ा जाने वाला अब तक का सबसे भारी उपग्रह होगा।
LVM3-M5/CMS-03 Mission Launch!
— ISRO (@isro) October 28, 2025
Watch the liftoff LIVE from the Launch Viewing Gallery, Space Theme Park – Sriharikota.
🗓️ 2 Nov 2025 (Sunday)
🕔 5:26 PM IST
🎟️ Free registration → https://t.co/i7dzpZcisS
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बाहुबली रॉकेट की ताकत और तैयारी
43.5 मीटर लंबे इस रॉकेट को भारी पेलोड ले जाने की क्षमता के कारण ‘बाहुबली’ नाम दिया गया है। एलवीएम3 तीन चरणों वाला लॉन्च व्हीकल है — इसमें दो ठोस मोटर स्ट्रैप-ऑन (S200), एक लिक्विड कोर स्टेज (L110) और एक क्रायोजेनिक स्टेज (C25) शामिल हैं। यह प्रणाली इसरो को भारी संचार उपग्रहों को अपनी ही भूमि से कक्षा में भेजने की पूरी क्षमता देती है। इस रॉकेट का इस्तेमाल पहले चंद्रयान-3 मिशन के लिए भी किया गया था, जिससे भारत ने 2023 में चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग की थी। एलवीएम3 अब इसरो के सबसे विश्वसनीय और शक्तिशाली प्रक्षेपण यानों में गिना जाता है।
मिशन का उद्देश्य और महत्व
इस मिशन का मुख्य उद्देश्य भारत और उसके समुद्री क्षेत्र के लिए मल्टी-बैंड कम्युनिकेशन सेवाएं उपलब्ध कराना है। CMS-03 उपग्रह देश के दूरस्थ क्षेत्रों में संचार और कनेक्टिविटी को मजबूत बनाएगा। इसरो ने बताया कि यह मिशन भारत को भारी उपग्रहों के प्रक्षेपण में आत्मनिर्भर बनाएगा और विदेशी लॉन्चरों पर निर्भरता कम करेगा। इससे पहले 2018 में इसरो ने अपने सबसे भारी उपग्रह जीसैट-11 (5,854 किग्रा) को फ्रेंच गुयाना से लॉन्च किया था, लेकिन CMS-03 पहली बार पूरी तरह भारतीय रॉकेट से छोड़ा जाएगा। इसरो के वैज्ञानिकों का कहना है कि यह मिशन भारत की अंतरिक्ष तकनीक को नई ऊंचाई देगा और वैश्विक स्तर पर उसकी क्षमता को और मजबूत करेगा।