ISROs new initiative: उत्तर प्रदेश का महोबा जिला अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाने जा रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के ‘विलेज साइंटिस्ट’ कार्यक्रम के तहत यहां 40 ग्रामीण स्पेस लैब स्थापित की जा रही हैं। इस पहल के साथ महोबा देश का पहला ऐसा जिला बन गया है, जहां गांव स्तर पर अंतरिक्ष प्रयोगशालाओं का नेटवर्क तैयार हो रहा है। सोमवार को इसरो अहमदाबाद के निदेशक नीलेश एम. देसाई ने रतौली गांव में पहली लैब का उद्घाटन किया।
छात्रों के लिए अवसर
इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण छात्रों को आधुनिक विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान से जोड़ना है। इन प्रयोगशालाओं में विद्यार्थियों को सैटेलाइट, रॉकेट तकनीक और अंतरिक्ष अनुसंधान से जुड़ी बुनियादी जानकारी दी जाएगी। इससे गांवों के बच्चों को बड़े शहरों जैसी वैज्ञानिक सुविधाएं मिलने का मार्ग खुलेगा।
पहली लैब का शुभारंभ
लखनऊ की व्योमिका फाउंडेशन के सहयोग से रतौली ग्राम पंचायत में पहली स्पेस लैब स्थापित की गई। उद्घाटन के दौरान निदेशक ने कहा कि भारत मानव रहित अंतरिक्ष मिशनों पर तेजी से आगे बढ़ रहा है और निकट भविष्य में मानवयुक्त मिशन भी भेजने की तैयारी है।
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2033 की योजना
निदेशक ने बताया कि भारत 2033 तक अपना स्पेस स्टेशन स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में अंतरिक्ष अनुसंधान की क्षमताएं और विस्तृत होंगी, जिससे देश वैश्विक स्तर पर मजबूत उपस्थिति दर्ज कराएगा।
छात्रों से संवाद
कार्यक्रम के दौरान छात्रों से संवाद करते हुए उन्होंने 2040 तक के रोडमैप की चर्चा की। उनका कहना था कि भविष्य में चंद्र मिशनों और स्पेस स्टेशन के उपयोग से भारत नई उपलब्धियां हासिल करेगा। यह पहल ग्रामीण युवाओं को विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी।