Italy eyes India IMEC Corridor: चीन के बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव से बाहर निकलने के बाद अब इटली ने भारत समर्थित इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर पर अपना फोकस बढ़ा दिया है। यह कॉरिडोर भारत, पश्चिम एशिया और यूरोप के बीच व्यापार को तेज और मजबूत बनाने की योजना है। इटली अब खुद को इस परियोजना में यूरोप के सबसे बड़े समुद्री प्रवेश द्वार के रूप में स्थापित करना चाहता है।
क्या है IMEC और क्यों है अहम?
IMEC यानी India-Middle East-Europe Economic Corridor एक बहुपक्षीय कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट है, जिसकी घोषणा 9 सितंबर 2023 को जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। इसमें भारत, अमेरिका, यूरोपीय संघ, सऊदी अरब, यूएई, फ्रांस, जर्मनी और इटली जैसे देश शामिल हैं। इस परियोजना का उद्देश्य समुद्री मार्ग, रेलवे, सड़क नेटवर्क, ऊर्जा और डिजिटल कनेक्टिविटी के जरिए व्यापार को अधिक तेज, सस्ता और भरोसेमंद बनाना है।
BRI छोड़ने के बाद बदली इटली की रणनीति
इटली दिसंबर 2023 में चीन के BRI प्रोजेक्ट से बाहर निकलने वाला पहला जी7 देश बना था। इटली का मानना था कि चीन के साथ इस परियोजना से उसे अपेक्षित आर्थिक लाभ नहीं मिला। इसके उलट व्यापार घाटा बढ़ा और निवेश उम्मीद से कम रहा। अब इटली अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करते हुए IMEC के जरिए नई आर्थिक भूमिका तलाश रहा है।
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इटली कैसे बनेगा यूरोप का एंट्री गेट?
इटली की योजना है कि भारत और खाड़ी देशों से आने वाला सामान भूमध्य सागर के जरिए उसके बंदरगाहों तक पहुंचे और वहां से पूरे यूरोप में सप्लाई हो। ट्रिएस्टे, जेनोआ और वेनिस जैसे बंदरगाह इस रणनीति के केंद्र में हैं। खासतौर पर ट्रिएस्टे को उसके डीप वाटर पोर्ट और मजबूत रेल नेटवर्क के कारण बेहद रणनीतिक माना जा रहा है, जहां से जर्मनी और मध्य यूरोप तक तेजी से माल पहुंचाया जा सकता है।
क्या BRI का विकल्प बन पाएगा IMEC?
राजनीतिक और आर्थिक हलकों में IMEC को चीन के BRI का जवाब माना जा रहा है। हालांकि दोनों मॉडल अलग हैं। BRI पूरी तरह चीन केंद्रित परियोजना है, जबकि IMEC बहुपक्षीय साझेदारी पर आधारित ढांचा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बंदरगाह विकास, सुरक्षा, निवेश और क्षेत्रीय स्थिरता जैसी चुनौतियों को पार कर लिया गया, तो IMEC आने वाले वर्षों में वैश्विक व्यापार और कनेक्टिविटी का बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है।