ITR Penalty Relief : इनकम टैक्स से जुड़ा एक दिलचस्प मामला सामने आया है, जिसमें एक व्यक्ति पर आयकर विभाग ने ₹3.74 लाख का जुर्माना लगाया, लेकिन बाद में आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने उसे पूरी तरह रद्द कर दिया। मामला एक ऐसे कर्मचारी का था, जिसकी सालाना आय 30 लाख रुपये से अधिक थी और उसने निर्धारित समय तक आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल नहीं किया था।
नौकरी बदलने से हुई परेशानी
मामले के अनुसार, संबंधित व्यक्ति ने वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान नौकरी बदली थी। उन्हें दोनों कंपनियों से समय पर फॉर्म-16 नहीं मिला। चूंकि उनकी सैलरी से टैक्स पहले ही कट चुका था और यह जानकारी फॉर्म-26AS में भी दिखाई दे रही थी, इसलिए उन्होंने यह मान लिया कि अलग से ITR भरने की जरूरत नहीं है। इसी वजह से उन्होंने रिटर्न दाखिल नहीं किया।
आयकर विभाग ने भेजा नोटिस
बाद में आयकर विभाग ने उनकी आय का रिकॉर्ड देखकर नोटिस जारी किया। नोटिस मिलने के बाद उन्होंने तुरंत जवाब दिया और अपनी पूरी 30,22,900 रुपये की आय घोषित करते हुए रिटर्न दाखिल कर दिया। विभाग ने उनकी बताई गई आय को सही माना और किसी अतिरिक्त टैक्स की मांग नहीं की।
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फिर क्यों लगा जुर्माना?
आयकर विभाग ने माना कि समय पर रिटर्न न भरना आय छिपाने जैसा है। विभाग ने इसे आय की “अंडर रिपोर्टिंग” मानते हुए आयकर अधिनियम की धारा 270A के तहत करीब ₹3.74 लाख का जुर्माना लगा दिया। विभाग का तर्क था कि रिटर्न दाखिल न करके करदाता ने अपनी आय रिपोर्ट नहीं की।
ITAT ने क्यों दी राहत?
मामला जब आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) पहुंचा तो अदालत ने धारा 270A(6)(a) का हवाला दिया। इस प्रावधान के अनुसार यदि करदाता के पास उचित कारण हो और वह सभी तथ्य सही-सही बता दे, तो उसे अंडर रिपोर्टिंग नहीं माना जा सकता। अदालत ने पाया कि नोटिस मिलने के बाद करदाता ने पूरी आय घोषित कर दी थी और विभाग ने भी उसमें कोई बदलाव नहीं किया।
करदाताओं के लिए क्या है सीख?
ITAT ने जुर्माना रद्द करते हुए कहा कि इस मामले में आय छिपाने का कोई प्रमाण नहीं है। हालांकि इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि ITR दाखिल करना जरूरी नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही TDS कट चुका हो, लेकिन निर्धारित समय के भीतर ITR भरना कानूनी जिम्मेदारी है। यदि किसी वजह से देरी हो जाए तो जल्द से जल्द सही जानकारी के साथ रिटर्न दाखिल कर देना चाहिए, ताकि भविष्य में विवाद की स्थिति न बने।