Jaishankars stern message: मोबिलिटी और वैश्विक कार्यबल पर आयोजित सम्मेलन में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका और यूरोपीय देशों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि जो भी देश सीमा पार प्रोफेशनल्स की आवाजाही में रुकावटें डाल रहे हैं, वे अंततः खुद नुकसान उठाएंगे। उन्होंने कहा कि दुनिया उन्नत विनिर्माण के दौर में प्रवेश कर रही है, जहां प्रतिभाशाली मानव संसाधन की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। ऐसे में प्रवासी पेशेवरों पर बाधाएं लगाना न केवल गलत है बल्कि आर्थिक प्रगति के लिए भी हानिकारक साबित होगा। जयशंकर का यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका ने एच-1बी वीजा पर सख्ती और भारी शुल्क बढ़ाने जैसे कदम उठाए हैं।
सीमा पार प्रतिभा का पारस्परिक लाभ
जयशंकर ने कहा कि भारत को दुनिया को यह समझाना होगा कि सीमा पार प्रतिभा का उपयोग सभी देशों के लिए फायदेमंद है। बिना किसी देश का नाम लिए उन्होंने कहा कि राजनीति और वोट बैंक की मजबूरियों के कारण कई देश मोबिलिटी के खिलाफ माहौल बना देते हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि बदलाव से उन्हें ही लाभ मिलेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विकसित देशों में नौकरियों की कमी का कारण प्रवासी लोग नहीं हैं, बल्कि यह इसलिए हुआ क्योंकि इन देशों ने अपनी मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियां बाहर भेज दीं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि लोगों की आवाजाही रोकी गई, तो कंपनियां अपनी गतिविधियां किसी अन्य देश में स्थानांतरित कर देंगी, काम कभी नहीं रुकता।
अवैध आवाजाही पर भी जताई चिंता
विदेश मंत्री ने कानूनी मोबिलिटी के महत्व पर जोर देते हुए बताया कि केवल पिछले वर्ष भारत को मिलने वाला 135 अरब डॉलर का रेमिटेंस, अमेरिका को किए गए भारतीय निर्यात के मुकाबले लगभग दोगुना है। उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में मानव संसाधन की साझा उपलब्धता एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही उन्होंने अवैध प्रवासन और मानव तस्करी के खतरों की भी चेतावनी दी। जयशंकर ने कहा कि अवैध आवाजाही में अक्सर अपराधी नेटवर्क, अलगाववादी एजेंडा और राजनीतिक फायदे के लिए काम करने वाले तत्व शामिल रहते हैं, जो देशों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। उन्होंने बताया कि कानूनी, सुरक्षित और विनियमित मोबिलिटी ही भविष्य की जरूरत है, और भारत हमेशा इस संतुलित दृष्टिकोण का समर्थन करेगा