प्रधानमंत्री जनधन योजना ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जानकारी दी है कि देश में जनधन खातों की संख्या 58 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई है। यह उपलब्धि दुनिया की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन योजनाओं में शामिल जनधन योजना की सफलता को दर्शाती है। सरकार का कहना है कि इस पहल ने करोड़ों लोगों को पहली बार औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा है और आर्थिक मुख्यधारा का हिस्सा बनाया है।
94 फीसदी वयस्क आबादी बैंकिंग दायरे में
28 अगस्त 2014 को शुरू हुई प्रधानमंत्री जनधन योजना ने पिछले कुछ वर्षों में अभूतपूर्व विस्तार देखा है। योजना की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि देश की लगभग 94 प्रतिशत वयस्क आबादी अब बैंकिंग प्रणाली से जुड़ चुकी है। यह बदलाव सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी बैंकिंग सेवाओं की पहुंच तेजी से बढ़ी है। कुल खातों में से बड़ी संख्या महिलाओं और ग्रामीण परिवारों की है, जिससे वित्तीय सशक्तिकरण को नई दिशा मिली है।
DBT ने बदली सरकारी सहायता की तस्वीर
वित्त मंत्री के अनुसार जनधन खातों ने सरकारी योजनाओं के लाभ सीधे लोगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से लाखों करोड़ रुपये की सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी गई है। इससे बिचौलियों की भूमिका कम हुई है और लाभार्थियों तक सरकारी सहायता पारदर्शी तरीके से पहुंची है। सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था ने लीकेज रोकने और कल्याणकारी योजनाओं की प्रभावशीलता बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
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महिलाओं और ग्रामीण भारत को मिला बड़ा लाभ
जनधन योजना की सबसे बड़ी उपलब्धियों में महिलाओं की भागीदारी मानी जा रही है। बड़ी संख्या में महिलाओं ने बैंक खाते खुलवाकर बचत और डिजिटल लेनदेन की दिशा में कदम बढ़ाया है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पहली बार बैंकिंग, बीमा और पेंशन जैसी सुविधाओं तक आसान पहुंच मिली है। इससे आर्थिक सुरक्षा का दायरा भी व्यापक हुआ है।
जीरो बैलेंस से लेकर बीमा तक कई सुविधाएं
जनधन खातों की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण इनके साथ मिलने वाली सुविधाएं भी हैं। खाताधारकों को जीरो बैलेंस पर खाता खोलने की सुविधा मिलती है। इसके अलावा रूपे डेबिट कार्ड, दुर्घटना बीमा कवर और जरूरत पड़ने पर ओवरड्राफ्ट सुविधा जैसी सेवाएं भी उपलब्ध हैं। सरकार का मानना है कि इन सुविधाओं ने बैंकिंग को गरीब और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए अधिक सुलभ और उपयोगी बनाया है। जनधन योजना की यह उपलब्धि देश में वित्तीय समावेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।