दिल्ली के जनकपुरी इलाके में बाइक सवार युवक की गड्ढे में गिरकर मौत के मामले में अब पुलिस ने पहली गिरफ्तारी कर ली है। दिल्ली पुलिस ने इस केस में सब-कॉन्ट्रैक्टर राजेश प्रजापति को गिरफ्तार किया है। हादसे के बाद लगातार उठ रहे सवालों और लोगों के गुस्से के बीच यह कार्रवाई अहम मानी जा रही है। पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है और गैर इरादतन हत्या की धाराएं लगाई गई हैं।
कमल ध्यानी की मौत, किसकी लापरवाही आई सामने
पुलिस के मुताबिक, मृतक युवक का नाम कमल ध्यानी था, जो एक निजी बैंक में काम करता था। हादसा गुरुवार देर रात हुआ, जब वह अपनी बाइक से जा रहा था। अचानक सड़क के बीच बने एक गहरे गड्ढे में बाइक समेत गिर गया। बाद में कमल का शव और उसकी मोटरसाइकिल करीब 20 फुट गहरे गड्ढे में मिली। इस दर्दनाक हादसे के बाद इलाके में भारी आक्रोश फैल गया।
एफआईआर में दिल्ली जल बोर्ड और ठेकेदार पर आरोप
दिल्ली पुलिस ने एफआईआर में साफ लिखा है कि यह गड्ढा दिल्ली जल बोर्ड और उसके ठेकेदार द्वारा आंध्र स्कूल के पास प्रोफेसर जोगिंदर सिंह मार्ग पर खोदा गया था। खुदाई के बाद गड्ढे को खुला छोड़ दिया गया। सबसे गंभीर बात यह रही कि वहां न तो कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया, न बैरिकेड्स और न ही कोई सुरक्षा गार्ड तैनात था, जिससे सड़क पर चलने वालों की जान खतरे में पड़ गई।
मौके के निरीक्षण में सामने आई गंभीर लापरवाही
पुलिस ने बताया कि हादसे के बाद जब मौके का निरीक्षण किया गया, तो साफ दिखा कि संबंधित अधिकारियों को खुदाई के काम की जानकारी थी। इसके बावजूद सुरक्षा के बुनियादी इंतजाम नहीं किए गए। एफआईआर में कहा गया है कि सड़क के बीचोंबीच गड्ढा होने के बावजूद कोई चेतावनी चिह्न या सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी, जो सीधे तौर पर लापरवाही और गैर-जिम्मेदारी को दिखाता है।
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सरकार ने बनाई हाई-लेवल जांच कमेटी
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली सरकार ने उच्च-स्तरीय जांच कमेटी का गठन किया है। कैबिनेट मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा से किसी भी हाल में समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि जिम्मेदार लोगों की पहचान कर सख्त कार्रवाई होगी। फिलहाल इस मामले में तीन अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है, जिससे साफ संकेत मिल रहा है कि सरकार इसे हल्के में नहीं ले रही।
आगे और गिरफ्तारियां संभव
पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और यह देखा जा रहा है कि इस लापरवाही में और कौन-कौन जिम्मेदार था। ठेकेदार, सब-कॉन्ट्रैक्टर और दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों की भूमिका की गहराई से जांच की जा रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस केस में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। यह मामला एक बार फिर सवाल खड़ा करता है कि शहर की सड़कों पर काम के नाम पर लोगों की जान को कितना जोखिम में डाला जा रहा है।