पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग के बीच राजनीति का पारा चरम पर पहुंच गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृष्णानगर की रैली में तृणमूल कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि झालमुड़ी उन्होंने खाई लेकिन उसकी मिर्ची टीएमसी को लग गई। उनके इस बयान ने चुनावी माहौल को और गरमा दिया है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में कमल खिलना तय है और 4 मई को जीत का जश्न मनाया जाएगा।
झालमुड़ी से शुरू हुआ पूरा विवाद
दरअसल प्रधानमंत्री हाल ही में चुनाव प्रचार के दौरान बंगाल दौरे पर गए थे, जहां उन्होंने एक स्थानीय दुकान से झालमुड़ी खाई थी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और करोड़ों लोगों ने इसे देखा। रैली में उसी घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने मजाकिया अंदाज में विपक्ष पर निशाना साधा। उनके इस बयान के बाद सियासी हलकों में बहस तेज हो गई और इसे चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
ममता बनर्जी का पलटवार भी तेज
प्रधानमंत्री के बयान पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे महज एक दिखावा बताते हुए कहा कि झालमुड़ी दुकानदार ने नहीं बनाई थी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री को मछली खानी चाहिए और जरूरत पड़ी तो वह खुद बनाकर खिलाएंगी। इस बयान के बाद मुद्दा और ज्यादा राजनीतिक हो गया है और दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
खानपान बना चुनावी हथियार
इस चुनाव में पहली बार बंगाल की पारंपरिक चीजें जैसे झालमुड़ी और मछली भी सियासत का हिस्सा बन गई हैं। टीएमसी का आरोप है कि भाजपा सत्ता में आने पर खानपान पर रोक लगा सकती है, जबकि भाजपा इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर रही है। इस बहस ने आम जनता के बीच भी चर्चा को बढ़ा दिया है और चुनावी माहौल को अलग ही दिशा दे दी है।
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वोटिंग के बीच बढ़ती बयानबाजी
राज्य में 152 सीटों पर मतदान जारी है और इसी बीच इस तरह के बयान चुनावी माहौल को और तेज बना रहे हैं। एक तरफ जहां नेता जनता को वोट डालने के लिए प्रेरित कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसे तंज और बयानबाजी से राजनीतिक माहौल लगातार गर्म बना हुआ है। अब देखना होगा कि इस सियासी जंग का असर वोटिंग और नतीजों पर कितना पड़ता है।