July Food Inflation : देश में जुलाई महीने के दौरान घरेलू रसोई का खर्च बढ़ गया है। क्रिसिल इंटेलिजेंस की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह की थाली की लागत पर खाद्य पदार्थों और ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर देखने को मिला। प्याज, एलपीजी और खाने के तेल की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाला है।
प्याज बना सबसे बड़ा कारण
रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई में प्याज की कीमतों में जून के मुकाबले 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। आलू भी 4 प्रतिशत महंगा हुआ, जबकि टमाटर की कीमत में 1 प्रतिशत की मामूली गिरावट आई। हालांकि टमाटर की सस्ती कीमत भी प्याज और अन्य आवश्यक वस्तुओं की महंगाई का असर कम नहीं कर सकी।
वेज थाली सात महीने में सबसे महंगी
क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई में शाकाहारी थाली की लागत बढ़कर 29.1 रुपये प्रति थाली पहुंच गई, जो पिछले सात महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। पिछले साल की तुलना में भी इसकी कीमत 4 प्रतिशत अधिक रही। रिपोर्ट में बताया गया है कि प्याज, खाद्य तेल और एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी इसकी प्रमुख वजह रही। सालाना आधार पर प्याज करीब 20 प्रतिशत, खाने का तेल 11 प्रतिशत और एलपीजी 10 प्रतिशत महंगा हुआ है।
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नॉन-वेज थाली भी महंगी
हालांकि जून की तुलना में जुलाई में नॉन-वेज थाली की लागत 58.3 रुपये पर स्थिर रही, लेकिन पिछले वर्ष जुलाई की तुलना में इसमें 9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इससे स्पष्ट है कि कुल मिलाकर खाद्य महंगाई का असर मांसाहारी भोजन पर भी बना हुआ है।
महंगाई के पीछे क्या वजह?
रिपोर्ट के अनुसार, मार्च और अप्रैल में महाराष्ट्र में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से प्याज की फसल और भंडारण प्रभावित हुआ, जिससे बाजार में महंगा प्याज पहुंचा। वहीं पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई, जिसका असर एलपीजी और खाद्य तेल की कीमतों पर भी पड़ा। इन कारणों से जुलाई में घरेलू रसोई का खर्च पिछले महीनों की तुलना में अधिक रहा।