Justice Yashwant Verma case: इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के इस्तीफे के बाद भी उनके खिलाफ कार्रवाई रुकती नजर नहीं आ रही है। सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार आगामी मानसून सत्र में उनके खिलाफ महाभियोग प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर विचार कर रही है। बताया जा रहा है कि अभी तक उनके इस्तीफे को औपचारिक मंजूरी नहीं मिली है। इस पूरे मामले ने न्यायपालिका और राजनीति दोनों में हलचल बढ़ा दी है।
जांच समिति ने सौंपी रिपोर्ट
जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच के लिए बनाई गई विशेष समिति अपनी रिपोर्ट लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को सौंप चुकी है। हालांकि रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि जांच में आरोपों को गंभीर माना गया है। सरकार का मानना है कि इस मामले को अंत तक ले जाना जरूरी है ताकि जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर स्पष्ट संदेश दिया जा सके।
जले हुए नोट मिलने के बाद शुरू हुई कार्रवाई
पूरा मामला उस समय सामने आया था जब दिल्ली स्थित जस्टिस वर्मा के आधिकारिक आवास में आग लगने की घटना हुई थी। बताया गया कि आग बुझाने के दौरान स्टोर रूम से बड़ी मात्रा में जले हुए नोट बरामद हुए थे। इसके बाद तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश की ओर से गठित आंतरिक समिति ने जांच शुरू की थी। जांच में कहा गया कि जिस कमरे से नकदी मिली, उस पर जस्टिस वर्मा का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष नियंत्रण था।
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संसद में हो सकती है बड़ी बहस
सूत्रों के अनुसार सरकार मानसून सत्र में इस मुद्दे पर चर्चा कराने की तैयारी में है। विपक्ष भी इस मामले पर नजर बनाए हुए है और संसद में इसे लेकर तीखी बहस होने की संभावना जताई जा रही है। इससे पहले 200 से अधिक सांसद जस्टिस वर्मा को हटाने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर चुके थे। हालांकि किसी जज को हटाने की प्रक्रिया न्यायाधीश जांच अधिनियम के तहत संसद के जरिए ही पूरी की जा सकती है।
इस्तीफे के बाद भी खत्म नहीं हुआ मामला
जस्टिस वर्मा ने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन उनका नाम अब भी इलाहाबाद हाई कोर्ट के जजों की सूची में मौजूद बताया जा रहा है। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस्तीफे के बावजूद सरकार इस मामले में संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करना चाहती है। अब सबकी नजर संसद के मानसून सत्र पर टिकी हुई है, जहां इस मुद्दे पर बड़ा राजनीतिक और कानूनी विवाद देखने को मिल सकता है।