कानपुर के बहुचर्चित कुशाग्र कनोडिया हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने ट्यूशन टीचर रचिता वत्स, उसके प्रेमी प्रभात शुक्ला और दोस्त शिवा गुप्ता को आजीवन कारावास की सजा दी है। अदालत ने माना कि तीनों ने मिलकर दसवीं के छात्र कुशाग्र की गला घोंटकर हत्या की थी। यह हत्या 30 लाख रुपये की फिरौती के लिए पूरी साजिश के तहत की गई थी। इस फैसले के साथ ही करीब ढाई साल पुराने इस सनसनीखेज मामले में न्यायिक प्रक्रिया एक अहम मोड़ पर पहुंची है।
अदालत में क्या सामने आया
सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने साफ हुआ कि कुशाग्र का अपहरण और फिर हत्या कोई अचानक हुई वारदात नहीं थी, बल्कि पहले से रची गई साजिश थी। कुशाग्र की पहचान, उसकी दिनचर्या और घर की स्थिति की पूरी जानकारी आरोपियों को थी। कोर्ट ने सबूतों और गवाहों के आधार पर तीनों को दोषी करार दिया। न्यायालय ने माना कि हत्या बेहद नृशंस थी और मासूम छात्र को सिर्फ पैसों के लिए मार दिया गया।
माता-पिता का दर्द छलका
कोर्ट के फैसले के बाद कुशाग्र के माता-पिता मीडिया के सामने भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि उन्हें सजा से कुछ हद तक संतोष है, लेकिन उनका दर्द आज भी कम नहीं हुआ। माता-पिता ने साफ कहा कि वे दोषियों के लिए फांसी की सजा चाहते थे। उनका कहना है कि बेटे का चेहरा याद आते ही रातों की नींद उड़ जाती है और हर दिन उसी दर्द के साथ गुजरता है।
कैसे हुआ था अपहरण
यह मामला अक्टूबर 2023 का है। कुशाग्र कनोडिया दसवीं का छात्र था और रोज की तरह शाम को स्कूटी से ट्यूशन के लिए घर से निकला था। देर रात तक जब वह वापस नहीं लौटा तो घरवालों की चिंता बढ़ गई। इसी बीच एक अजनबी घर के पास 30 लाख रुपये की फिरौती का पर्चा फेंककर फरार हो गया। इससे परिवार पूरी तरह घबरा गया और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।
इसे भी पढ़ें : Ranji ट्रॉफी में Jadeja फेल, सौराष्ट्र ढह गया, Punjab के Harpreet Brar ने राजकोट में अकेले मचा दी तबाही
अगली सुबह मिला शव
पुलिस ने किडनैपिंग की आशंका में जांच शुरू की, लेकिन अगली सुबह कुशाग्र की लाश बरामद हो गई। शव फजलगंज थाना क्षेत्र में स्थित उसकी ट्यूशन टीचर रचिता वत्स के घर के स्टोर रूम से मिला। इस खुलासे ने पूरे शहर को झकझोर दिया। जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को पता चला कि हत्या गला घोंटकर की गई थी।
पैसे के लिए रची गई साजिश
जांच में सामने आया कि कुशाग्र की हत्या रचिता के प्रेमी प्रभात शुक्ला ने की थी, जिसमें रचिता और उसका दोस्त शिवा गुप्ता भी शामिल था। तीनों का मकसद सिर्फ 30 लाख रुपये की फिरौती हासिल करना था। पुलिस ने मजबूत सबूत जुटाए और केस कोर्ट तक पहुंचा। अब अदालत के फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि कुशाग्र की हत्या एक सोची-समझी साजिश थी, जिसने एक परिवार की पूरी दुनिया उजाड़ दी।