Kanpur-Lucknow Expressway : कानपुर और लखनऊ को जोड़ने वाले नए एक्सप्रेसवे पर सफर करने वालों के लिए बड़ी राहत की खबर है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली फिलहाल रोक दी है। हाल ही में सड़क धंसने और कई जगह निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद यह फैसला लिया गया है। अब मरम्मत का काम पूरा होने तक इस एक्सप्रेसवे पर यात्रियों से किसी तरह का टोल नहीं लिया जाएगा। एनएचएआई का कहना है कि निर्माण में हुई लापरवाही की जिम्मेदारी ठेकेदार कंपनी से तय की जाएगी और टोल बंद होने से होने वाले नुकसान की भरपाई भी उसी से कराई जाएगी।
उद्घाटन के कुछ दिन बाद ही सामने आई खामियां
करीब 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को हुआ था, लेकिन कुछ ही दिनों बाद कई स्थानों पर सड़क खराब होने और 64वें किलोमीटर के पास सड़क धंसने की शिकायतें सामने आने लगीं। सोशल मीडिया पर यात्रियों ने सड़क की गुणवत्ता को लेकर कई वीडियो साझा किए, जिनमें उन्नाव-लखनऊ कैरिजवे पर पैचवर्क और खराब निर्माण दिखाई दिया। इन शिकायतों के बाद एनएचएआई ने मौके का निरीक्षण किया और तत्काल मरम्मत कार्य शुरू करा दिया। फिलहाल प्रभावित हिस्से पर ट्रैफिक डायवर्ट किया गया है और वाहनों की आवाजाही जारी है।
275 रुपये का टोल फिलहाल पूरी तरह बंद
एक्सप्रेसवे पर कार, जीप और वैन से एक तरफ के सफर के लिए 275 रुपये टोल लिया जा रहा था। हालांकि अब मरम्मत पूरी होने तक टोल वसूली पूरी तरह रोक दी गई है। एनएचएआई ने स्पष्ट किया है कि इस अवधि में यात्रियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। अथॉरिटी का कहना है कि पहले सड़क को पूरी तरह सुरक्षित और बेहतर बनाया जाएगा, उसके बाद ही टोल वसूली दोबारा शुरू करने पर फैसला लिया जाएगा।
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ठेकेदार कंपनी समेत कई अधिकारियों पर कार्रवाई
निर्माण में कथित लापरवाही को लेकर एनएचएआई ने ठेकेदार कंपनी PNC इंफ्राटेक लिमिटेड को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कंपनी को भविष्य की परियोजनाओं से प्रतिबंधित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही कंपनी पर जुर्माना लगाने और जिम्मेदार अधिकारियों को तीन साल तक एनएचएआई की परियोजनाओं से दूर रखने का प्रस्ताव भी रखा गया है। सड़क की मरम्मत का पूरा खर्च भी ठेकेदार कंपनी को अपने स्तर पर उठाना होगा, जिसकी अनुमानित लागत करीब 3 करोड़ रुपये बताई गई है।
इंजीनियर और प्रोजेक्ट अधिकारियों पर भी गिरी गाज
एनएचएआई ने परियोजना से जुड़े कई अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रोजेक्ट मैनेजर, इंडिपेंडेंट इंजीनियर और रेजिडेंट इंजीनियर को तत्काल प्रभाव से हटाते हुए दो साल तक सड़क परिवहन मंत्रालय, एनएचएआई और एनएचआईडीसीएल की परियोजनाओं से प्रतिबंधित कर दिया गया है। वहीं मौजूदा प्रोजेक्ट डायरेक्टर को उनके मूल विभाग में वापस भेज दिया गया है और उनके साथ पूर्व प्रोजेक्ट डायरेक्टर के खिलाफ भी चार्जशीट जारी करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
IIT खड़गपुर करेगी सड़क धंसने की जांच
सड़क धंसने की वजह जानने के लिए एनएचएआई ने आईआईटी खड़गपुर के प्रोफेसर के.एस. रेड्डी की अगुवाई में विशेषज्ञों की टीम गठित की है। यह टीम पूरे मामले की तकनीकी जांच करेगी और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए सुझाव देगी। साथ ही पूरे एक्सप्रेसवे की सड़क की गुणवत्ता का लेजर प्रोफाइलोमीटर तकनीक से परीक्षण कराया जाएगा। एनएचएआई का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण और रखरखाव में गुणवत्ता, सुरक्षा और जवाबदेही से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।