KCC Loan Benefits : किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। अब कृषि कार्यों के साथ बकरी पालन और सुअर पालन से जुड़े लोगों को भी KCC के जरिए वित्तीय सहायता मिल सकेगी। इससे छोटे पशुपालकों को अपने कारोबार के लिए जरूरी पूंजी जुटाने में मदद मिलने की उम्मीद है। KCC के तहत तय सीमा तक किसान जरूरत के मुताबिक राशि निकाल सकते हैं।
समय पर भुगतान पर सस्ता कर्ज
KCC के तहत सामान्य ब्याज दर 7 फीसदी बताई गई है। समय पर लोन चुकाने वाले पात्र किसानों को सरकार की ओर से 3 फीसदी ब्याज सब्सिडी मिल सकती है। इस तरह प्रभावी ब्याज दर 4 फीसदी तक रह जाती है। यही वजह है कि किसानों के लिए KCC खेती और उससे जुड़े कारोबार के खर्चों को पूरा करने का एक अहम वित्तीय साधन माना जाता है।
खेती से पशुपालन तक खर्च
KCC के जरिए किसान बीज, खाद, कीटनाशक और सिंचाई जैसे कृषि खर्चों के लिए पैसे का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा खेत में काम करने वाले मजदूरों की मजदूरी, छोटे कृषि उपकरण खरीदने और उनकी मरम्मत, फसल कटाई के बाद होने वाले खर्च और फसल की मार्केटिंग से जुड़ी जरूरतों को भी इसमें शामिल किया गया है। डेयरी, पशुपालन, मछली पालन, मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन और रेशम कीट पालन जैसी गतिविधियों के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
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घरेलू जरूरतों में भी इस्तेमाल
KCC का इस्तेमाल सिर्फ खेती या पशुपालन तक सीमित नहीं है। पात्र किसान परिवार की कुछ घरेलू और उपभोग संबंधी जरूरतों के लिए भी इससे राशि निकाल सकते हैं। बकरी और सुअर पालन को दायरे में शामिल किए जाने से ग्रामीण इलाकों में छोटे स्तर पर पशुपालन करने वाले लोगों को भी सस्ती कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने का रास्ता खुल सकता है।
KCC के लिए कौन से दस्तावेज
KCC के लिए पात्रता और लोन की सीमा बैंक तथा संबंधित नियमों के आधार पर तय होती है। आमतौर पर किसान की पहचान, जमीन और संबंधित गतिविधि से जुड़े दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है। इनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, राशन कार्ड, बिजली बिल और जमीन के कागजात जैसे दस्तावेज शामिल हो सकते हैं। पशुपालन या मछली पालन के लिए संबंधित बुनियादी ढांचे और गतिविधि से जुड़े दस्तावेज भी मांगे जा सकते हैं।