Kejriwal Questions On E-20 Petrol: देश में E-20 पेट्रोल को लेकर बहस के बीच आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने 29 ऑटोमोबाइल कंपनियों को पत्र लिखकर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है कि यदि E-20 पेट्रोल के इस्तेमाल से पुराने वाहनों की माइलेज कम होती है या किसी पुर्जे को नुकसान पहुंचता है, तो क्या वाहन निर्माता कंपनियां ग्राहकों को मुआवजा देंगी। इस मुद्दे पर उन्होंने कुछ प्रमुख वाहन कंपनियों को अलग से भी पत्र भेजा है और स्पष्ट जवाब देने की मांग की है।
वाहन कंपनियों से पूछे दो अहम सवाल
अरविंद केजरीवाल ने कंपनियों से पूछा है कि यदि E-20 पेट्रोल के उपयोग से किसी वाहन की माइलेज में पांच प्रतिशत से अधिक की गिरावट आती है या इंजन अथवा अन्य पुर्जों को नुकसान होता है, तो क्या उसकी भरपाई की जाएगी। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि वर्ष 2023 से पहले बने सभी वाहनों में E-20 पेट्रोल का उपयोग पूरी तरह सुरक्षित है या नहीं। यदि सुरक्षित है, तो संभावित नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा।
केंद्र सरकार ने बताया सुरक्षित
इस मुद्दे पर केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि E-20 पेट्रोल को लेकर फैल रही आशंकाएं भ्रामक जानकारी पर आधारित हैं। उनके अनुसार, वाहन निर्माता कंपनियां और तकनीकी विशेषज्ञ पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि E-20 पेट्रोल के उपयोग से किसी तरह की समस्या नहीं होती। उन्होंने कहा कि लोगों को बिना पुष्टि के फैल रही जानकारियों से भ्रमित नहीं होना चाहिए।
एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने का है सरकार का लक्ष्य
केंद्र सरकार देशभर में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E-20) को चरणबद्ध तरीके से लागू कर रही है। सरकार का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, विदेशी मुद्रा की बचत करना और किसानों की आय बढ़ाने के लिए एथेनॉल उत्पादन को प्रोत्साहित करना है। सरकार का कहना है कि यह योजना तकनीकी परीक्षणों और विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर लागू की जा रही है।
बहस के बीच जवाब का इंतजार
E-20 पेट्रोल को लेकर उठे सवालों के बाद अब सभी की नजर ऑटोमोबाइल कंपनियों के जवाब पर है। यदि कंपनियां इस विषय पर आधिकारिक प्रतिक्रिया देती हैं, तो इससे वाहन मालिकों की शंकाएं दूर हो सकती हैं। फिलहाल सरकार और विपक्ष इस मुद्दे पर अलग-अलग पक्ष रख रहे हैं, जबकि उपभोक्ता स्पष्ट जानकारी मिलने का इंतजार कर रहे हैं।