Lalu Yadav Family Feud: बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की हार के बाद लालू प्रसाद यादव के परिवार में कलह खुलकर सामने आ गई है, जिससे राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इस आंतरिक विवाद के बीच, भाजपा ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय प्रवक्ता निखिल आनंद ने लालू की बेटियों, रोहिणी आचार्य और राज्यसभा सांसद मीसा भारती से आगे आने और RJD की कमान संभालने की सार्वजनिक अपील की है। निखिल आनंद ने तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि वे पार्टी का नेतृत्व करने और परिवार को एकजुट रखने दोनों में असफल रहे हैं। उन्होंने इसे लालू परिवार के लिए एक संकट का समय बताते हुए कहा कि मीसा और रोहिणी को राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में सामने आना चाहिए और पार्टी को नई दिशा देनी चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब रोहिणी आचार्य ने अपने ही भाई तेजस्वी के करीबी सलाहकारों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
रोहिणी ने लगाया अपमान का आरोप
लालू परिवार में विवाद तब गहराया जब लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य ने चुनाव परिणाम के ठीक बाद राजनीति और परिवार से दूरी बनाने का ऐलान कर दिया। रोहिणी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए तेजस्वी यादव के करीबी सलाहकारों, खासकर संजय यादव (राज्यसभा सांसद) और रमीज पर उन्हें अपमानित करने का आरोप लगाया। उन्होंने यहां तक कहा कि उन्हें चप्पल चलाने को कहा गया। रोहिणी के इस भावनात्मक बयान और आरोपों ने परिवार के अंदर चल रही खींचतान को सार्वजनिक कर दिया। उन्होंने सारी जिम्मेदारी लेते हुए राजनीति से खुद को अलग करने की घोषणा की। निखिल आनंद ने मीसा भारती की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब परिवार बिखर रहा है, तब उनका मौन रहना जवाबदेही से मुंह मोड़ना है।
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BJP नेता ने साधा तेजस्वी पर निशाना
रोहिणी आचार्य के आरोपों और उनके भावुक पोस्ट के बाद निखिल आनंद ने मीसा भारती और रोहिणी से भावनात्मक और नैतिक जिम्मेदारी निभाने की अपील की। उनका सीधा निशाना तेजस्वी यादव पर था, जिनकी लीडरशिप में RJD चुनाव हार गई। आनंद ने कहा कि तेजस्वी न तो पार्टी चला पाए और न ही परिवार को बचा पाए, इसलिए अब वक्त आ गया है कि लालू की बेटियां RJD की बागडोर संभालें और परिवार की राजनीति को फिर से पटरी पर लाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि मीसा और रोहिणी के पास ही लालू की राजनीतिक विरासत को बचाने की क्षमता है। यह अपील बिहार की राजनीति में एक बड़ी बहस छेड़ सकती है, जहां पहले से ही RJD की हार के बाद नेतृत्व को लेकर सवाल उठ रहे हैं।