कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के वेटलिफ्टर लवप्रीत सिंह ने पुरुषों के 110+ किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। पंजाब के अमृतसर जिले के सीमावर्ती गांव बल सिकंदर के रहने वाले लवप्रीत ने कुल 388 किलोग्राम (176 किग्रा स्नैच + 212 किग्रा क्लीन एंड जर्क) वजन उठाया। वह स्वर्ण पदक से सिर्फ एक किलोग्राम पीछे रह गए, लेकिन उनके संघर्ष की कहानी ने पूरे देश का दिल जीत लिया।
दर्जी पिता ने सपनों को नहीं रुकने दिया
लवप्रीत का परिवार बेहद साधारण है। उनके पिता गांव में दर्जी का काम करते हैं, जबकि दादा सब्जियां बेचकर परिवार चलाते थे। आर्थिक हालात मजबूत नहीं थे, लेकिन परिवार ने कभी बेटे के सपनों पर समझौता नहीं किया। पिता चाहते तो लवप्रीत को सिलाई के काम में लगा सकते थे, लेकिन उन्होंने बेटे के हाथों में सुई-धागा नहीं, बल्कि बारबेल थमा दिया। महज 13 साल की उम्र में लवप्रीत ने अमृतसर के डीएवी मैदान से वेटलिफ्टिंग की शुरुआत की।
आर्थिक तंगी के बीच जारी रही मेहनत
लवप्रीत ने कई बार बताया कि परिवार आर्थिक कठिनाइयों से जूझता रहा, लेकिन माता-पिता ने उनकी ट्रेनिंग और खान-पान में कभी कमी नहीं आने दी। लगातार मेहनत का ही नतीजा था कि वर्ष 2015 में उन्हें भारतीय नौसेना में नौकरी मिली। इसके बाद पटियाला के राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में अभ्यास का मौका मिला और यहीं से उनका करियर नई ऊंचाइयों पर पहुंचने लगा।
रिकॉर्ड बनाया, लेकिन एक किलो से छूटा गोल्ड
ग्लासगो में लवप्रीत ने स्नैच में 168, फिर 173 और तीसरे प्रयास में 176 किलोग्राम वजन उठाकर कॉमनवेल्थ गेम्स का नया रिकॉर्ड बना दिया। इसके बाद क्लीन एंड जर्क में उन्होंने 212 किलोग्राम सफलतापूर्वक उठाया। स्वर्ण पदक जीतने के लिए उन्होंने 217 किलोग्राम का साहसी प्रयास किया, लेकिन अंतिम कोशिश में वजन सिर के ऊपर स्थिर नहीं रख सके। इसी का फायदा न्यूजीलैंड के डेविड एंड्रयू लिटी ने उठाया, जिन्होंने 223 किलोग्राम उठाकर कुल 389 किलोग्राम के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। लवप्रीत सिर्फ एक किलोग्राम के अंतर से गोल्ड से चूक गए।
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कांस्य से रजत तक का शानदार सफर
बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में कांस्य पदक जीतने वाले लवप्रीत ने इस बार अपने प्रदर्शन में सुधार करते हुए रजत पदक हासिल किया। उनके साथ भारत ने वेटलिफ्टिंग में शानदार अभियान पूरा किया, जहां टीम ने एक स्वर्ण, छह रजत और एक कांस्य सहित कुल आठ पदक जीते। लवप्रीत की कहानी यह साबित करती है कि बड़े सपनों के लिए बड़े साधनों की नहीं, बल्कि मजबूत हौसले और परिवार के भरोसे की जरूरत होती है।