मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण दुनिया भर में ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गई है। ऐसे समय में वित्त मंत्री ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि भारत में एलपीजी की सप्लाई फिलहाल स्थिर बनी हुई है। उन्होंने बताया कि सरकार की ऊर्जा नीति और पिछले कई सालों से किए गए सुधारों की वजह से यह संभव हो पाया है। एक्सपर्ट मानते हैं कि संकट के समय पहले से की गई तैयारी ही देश को बड़े झटकों से बचाती है।
होर्मुज रास्ते पर निर्भरता बनी चिंता
भारत की एलपीजी सप्लाई का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है। यही कारण है कि जब इस क्षेत्र में तनाव बढ़ा, तो सप्लाई को लेकर चिंता भी बढ़ गई। हालांकि सरकार का कहना है कि इस स्थिति के बावजूद देश में गैस की आपूर्ति लगातार जारी है। एक्सपर्ट के अनुसार अगर यह रास्ता पूरी तरह बाधित होता, तो हालात काफी मुश्किल हो सकते थे, लेकिन फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।
आत्मनिर्भरता की रणनीति आई काम
वित्त मंत्री ने बताया कि देश ने पिछले कुछ सालों में ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम किया है। इसी वजह से अब संकट के समय भी स्थिति संभली हुई है। उन्होंने कहा कि घरेलू उत्पादन बढ़ाने और नई नीतियों के कारण सप्लाई पर दबाव कम हुआ है। एक्सपर्ट का मानना है कि यही रणनीति आने वाले समय में भी देश को ऊर्जा संकट से बचाने में मदद करेगी।
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घरेलू उत्पादन में हुआ बड़ा इजाफा
सरकार के अनुसार एलपीजी के घरेलू उत्पादन में करीब 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। इससे आयात पर निर्भरता कुछ हद तक कम हुई है। इसके अलावा अन्य स्रोतों से भी गैस उत्पादन बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। एक्सपर्ट बताते हैं कि घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ना किसी भी देश के लिए सबसे बड़ी ताकत होता है, खासकर तब जब वैश्विक हालात अस्थिर हों।
बिजली उत्पादन क्षमता भी बढ़ी
वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि देश की बिजली उत्पादन क्षमता में भी बड़ा इजाफा हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में यह क्षमता दोगुनी से ज्यादा हो चुकी है। इससे ऊर्जा के दूसरे विकल्प भी मजबूत हुए हैं और दबाव कम हुआ है। एक्सपर्ट मानते हैं कि ऊर्जा के कई स्रोत होने से किसी एक संकट का असर कम हो जाता है।
आम लोगों के लिए क्या है मतलब
सरकार का दावा है कि मौजूदा हालात में आम लोगों को गैस की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। सप्लाई को लगातार बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। एक्सपर्ट के अनुसार अगर यही स्थिति बनी रहती है, तो लोगों को राहत मिलती रहेगी और बाजार में अचानक कीमतों का दबाव भी कम रहेगा। फिलहाल नजर इस बात पर है कि वैश्विक हालात आगे किस दिशा में जाते हैं।