लखनऊ के अलीगंज में तीन मंजिला इमारत में लगी आग ने 15 परिवारों की दुनिया बदल दी। कोई बेटा नौकरी करने गया था तो कोई बेटी अपने सपने पूरे करने निकली थी। लेकिन धुआं और आग इतनी तेजी से फैली कि कई लोग बाहर नहीं निकल सके। अब इस हादसे के बाद सरकार ने जांच तेज कर दी है। मुख्यमंत्री आवास पर हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद दो सदस्यीय विशेष जांच दल यानी SIT बना दिया गया है। इस टीम को सात दिन में अपनी रिपोर्ट देनी होगी।
अमृत अभिजात के हाथ जांच की कमान
SIT में अपर मुख्य सचिव पर्यटन अमृत अभिजात को शामिल किया गया है। वह 1995 बैच के यूपी कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। अमृत अभिजात आगरा कानपुर नगर मुजफ्फरनगर और प्रयागराज के जिलाधिकारी रह चुके हैं। प्रयागराज महाकुंभ की जिम्मेदारी भी उनके पास रह चुकी है। केंद्र सरकार में आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय में भी उन्होंने काम किया है। अब उनके सामने यह पता लगाने की जिम्मेदारी है कि इमारत के इस्तेमाल में नियमों की अनदेखी हुई या नहीं।
प्रवीण कुमार देखेंगे पुलिस की जांच
एसआईटी के दूसरे सदस्य एडीजी लखनऊ जोन प्रवीण कुमार हैं। वह 2001 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और मूल रूप से जालौन जिले के रहने वाले हैं। प्रवीण कुमार को यूपी पुलिस के तेज तर्रार अधिकारियों में गिना जाता है। वह इंजीनियरिंग के साथ कानून की पढ़ाई भी कर चुके हैं। अब वह यह जांचेंगे कि आग लगने के बाद बचाव अभियान में कोई कमी रही या नहीं। साथ ही इमारत मालिकों अधिकारियों और दूसरे जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी देखी जाएगी।
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सात दिन में खुल सकते हैं बड़े राज
एसआईटी इमारत के नक्शे फायर सेफ्टी व्यवस्था और वहां चल रही व्यावसायिक गतिविधियों की जांच करेगी। यह भी देखा जाएगा कि रिहायशी इलाके में इतनी बड़ी कमर्शियल गतिविधि किसकी अनुमति से चल रही थी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि आसपास की कई इमारतों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी हो रही है। सवाल यह भी है कि क्या इमारत में पर्याप्त इमरजेंसी एग्जिट था और क्या फायर विभाग ने कभी वहां सुरक्षा जांच की थी।
योगी ने रद्द किए सभी कार्यक्रम
हादसे की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपना अलीगढ़ दौरा बीच में छोड़कर लखनऊ लौट आए थे। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया और केजीएमयू पहुंचकर घायलों का हाल जाना। इसके बाद उन्होंने हाथरस और आगरा के प्रस्तावित दौरे समेत मंगलवार के सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए। भाजपा ने भी शोक जताते हुए अपने संगठनात्मक कार्यक्रम स्थगित कर दिए हैं। फॉरेंसिक टीम भी मौके पर पहुंचकर आग लगने की असली वजह तलाश रही है।
मदद मिली लेकिन जवाब का इंतजार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के परिजनों को पांच पांच लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है। लेकिन जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है उनके लिए सबसे जरूरी सवाल न्याय का है। सात दिन बाद एसआईटी की रिपोर्ट बताएगी कि आखिर यह हादसा कैसे हुआ और किसकी लापरवाही से 15 जिंदगियां चली गईं। अब पूरे उत्तर प्रदेश की नजर इस जांच पर है कि दोषियों पर सिर्फ कार्रवाई होगी या परिवारों को सच में इंसाफ मिलेगा।